
जयपुर। अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन इस भयावह विमान हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द आज भी वैसा ही ताजा है। 260 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे को दुनिया की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में गिना जाता है। परिजनों का कहना है कि एक साल बाद भी उन्हें न तो हादसे की असली वजह बताई गई है और न ही किसी की जवाबदेही तय हुई है।
इस दुर्घटना में राजस्थान के बालोतरा जिले की 20 वर्षीय नवविवाहिता खुशबू कंवर राजपुरोहित की भी मौत हुई थी। खुशबू पहली बार अपने पति के पास लंदन जाने के लिए रवाना हुई थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। विमान के उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद हुए हादसे में उनकी जान चली गई।
हादसे से कुछ समय पहले खुशबू के पिता मदन सिंह राजपुरोहित ने अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बेटी के साथ एक तस्वीर खिंचवाई थी और उसे अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा किया था। बेटी के विदेश जाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी।
उस समय शायद किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह पिता-पुत्री की आखिरी तस्वीर बन जाएगी। अब वही दृश्य परिवार के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया है।
अहमदाबाद विमान हादसे की सबसे हृदयविदारक कहानियों में से एक बांसवाड़ा के डॉक्टर परिवार की है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीक जोशी, उनकी पत्नी डॉ. कोमी व्यास और उनके बच्चों की इस दुर्घटना में मौत हो गई थी।
डॉ. प्रतीक पिछले चार वर्षों से लंदन में कार्यरत थे और तीन दिन पहले ही परिवार को अपने साथ ले जाने के लिए भारत आए थे। उनकी पत्नी डॉ. कोमी व्यास उदयपुर के पैसिफिक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत थीं और परिवार के साथ लंदन जाने के लिए कुछ दिन पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन नई जिंदगी शुरू होने से पहले ही पूरा परिवार काल के गाल में समा गया।
आणंद निवासी पार्थ पटेल ने इस हादसे में अपनी मां हेमांगिनी पटेल, चाचा रजनीकांत पटेल और चाची दिव्या पटेल को खो दिया था। तीनों लंदन जा रहे थे, जहां परिवार की सदस्य ध्वनि को मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री मिलनी थी। पार्थ कहते हैं कि इसे केवल एक त्रासदी कहना गलत होगा। उनके अनुसार यह एक बड़ी विफलता थी। उनका कहना है कि एक साल बीत जाने के बावजूद न अंतिम जांच रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया गया है। न्याय के जो वादे किए गए थे, वे अब तक केवल कागजों तक सीमित हैं।
हादसे में अपने माता-पिता दिलीप और मीना पटेल को खोने वाले देवर्ष पटेल का कहना है कि परिवारों को अब कम से कम यह जानने का अधिकार है कि विमान आखिर दुर्घटनाग्रस्त क्यों हुआ। उन्होंने मांग की है कि ब्लैक बॉक्स से प्राप्त जानकारी और जांच के निष्कर्ष पीड़ित परिवारों के साथ साझा किए जाएं। राजस्थान के बांसवाड़ा निवासी अनिल व्यास, जिन्होंने अपनी बेटी कोमी को इस हादसे में खोया, उन्होंने पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि आर्थिक सहायता इस मामले का अंतिम समाधान नहीं हो सकती। पार्थ पटेल का कहना है कि किसी परिवार के दर्द और नुकसान को पैसों में नहीं तौला जा सकता। वे एयर इंडिया, टाटा समूह और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि केवल मुआवजा देकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। परिवारों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
इस हादसे में चमत्कारिक रूप से जीवित बचने वाले ब्रिटिश नागरिक विश्वाशकुमार रमेश आज भी शारीरिक और मानसिक आघात से जूझ रहे हैं। हादसे में उनके छोटे भाई अजय की मौत हो गई थी। उनके करीबी संजीव पटेल के अनुसार विश्वाशकुमार आज भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था।
इस वर्ष अप्रैल में करीब 15 परिवारों ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत संबंधित एजेंसियों को पत्र लिखकर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की थी। उनका कहना है कि हादसे की असली वजह सामने आएगी तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
एयर इंडिया के अनुसार मृतकों के 96 प्रतिशत परिवारों को 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता और 91 प्रतिशत परिवारों को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि शेष मामलों में दस्तावेजी प्रक्रियाएं अधूरी हैं या पारिवारिक विवाद चल रहे हैं।
एयर इंडिया ने यह भी बताया कि दुर्घटनास्थल से 22 हजार से अधिक सामान बरामद किए गए थे, जिनमें से अधिकांश परिजनों को लौटाए जा चुके हैं। हालांकि कई परिवार इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि उन्हें अब भी अपने प्रियजनों की यादों से जुड़े महत्वपूर्ण सामान और सबसे बढ़कर हादसे की सच्चाई का इंतजार है।
अहमदाबाद विमान हादसे ने राजस्थान समेत देश के कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जो शायद कभी नहीं भर पाएगा। बेहतर भविष्य, परिवार से मिलने और नई जिंदगी शुरू करने के सपने लेकर निकले ये लोग कुछ ही मिनट में मौत के मुंह में समा गए। उनकी अधूरी कहानियां अब केवल यादों में ही जिंदा रहेंगी।