जयपुर

Rajasthan: राजस्थान पत्रिका का ‘अमृतं जलम्’ अभियान बना मिसाल, जल स्रोतों की सफाई कर दिया जल संरक्षण का संदेश

राजस्थान में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से राजस्थान पत्रिका का 'अमृतं जलम्' अभियान शुरू हो गया है। अभियान के तहत रविवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तालाबों, जलाशयों और जल आवक मार्गों की सफाई करने में श्रमदान किया।
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May 11, 2026
राजस्थान पत्रिका 'अमृतं जलम्' अभियान में श्रमदान करते लोग, पत्रिका फोटो
राजस्थान पत्रिका 'अमृतं जलम्' अभियान में श्रमदान करते लोग, पत्रिका फोटो

राजस्थान में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से राजस्थान पत्रिका का 'अमृतं जलम्' अभियान शुरू हो गया है। अभियान के तहत रविवार को विभिन्न जिलों में तालाबों, जलाशयों और जल आवक मार्गों की सफाई करने में श्रमदान किया। लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए जल संरक्षण का संदेश दिया।

बीकानेर में महानंद तालाब परिसर में अभियान के दौरान झाड़ियां हटाई गई, कचरा साफ किया गया तथा बारिश के पानी की आवक के मार्ग को सुगम बनाया गया। कोटा जिले में श्रीचौमेश्वर महादेव मंदिर परिसर स्थित प्राचीन कुंड की सफाई की गई। श्रीचौमेश्वर महादेव सेवा समिति ने श्रमदान कर प्राचीन जलस्रोत को स्वच्छ बनाया और जल संरक्षण का संदेश दिया।
सीकर जिले में अभियान के तहत कांग्रेस सेवादल की ओर से डीगावाली (खरवासड़ा) जोहड़ा, सिहोड़ी में जलस्रोतों में सफाई अभियान चलाया गया। मिट्टी हटाई तथा पानी आने की रुकावट को दूर किया। इससे बरसात के मौसम में आसपास के पानी का बहाव इसमें होगा और जल संरक्षण को भी मदद मिलेगी।

लोकगीतों और भक्ति गीतों के साथ किया श्रमदान

जोधपुर में कायलाना की पहाड़ियों स्थित महाभारतकालीन भीम भड़क से सटे ऐतिहासिक प्राचीन जलाशय परिसर में श्रमदान किया गया। ढाई घंटे तक चले इस अभियान में महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी लोकगीतों और भक्ति गीतों की स्वर लहरियों के बीच श्रमदान कर आयोजन को सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का अनूठा स्वरूप प्रदान किया।

राजस्थान पत्रिका की सामाजिक सरोकार की पहल

राजस्थान पत्रिका का 'अमृतं जलम्' अभियान पारंपरिक जल स्रोतों जैसे तालाब, बावड़ी और कुएं के संरक्षण, जीर्णोद्धार और सफाई के लिए जनभागीदारी पर केंद्रित एक प्रमुख सामाजिक सरोकार पहल है। यह अभियान गर्मियों में चिलचिलाती धूप में सूखे जल निकायों की सफाई, गाद निकालने और आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रयासरत है।

अमृतं जलम् अभियान के तहत हर साल गर्मियों से पहले जल स्रोतों को साफ कर वर्षा जल संचयन के लिए तैयार करने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए जनसहयोग से श्रमदान करते हैं। अभियान के तहत श्रमदान के माध्यम से तालाबों से प्लास्टिक, कचरा और गाद हटाई जाती है। अभियान में छात्र, स्काउट गाइड, स्थानीय वासी, अधिकारी और समाजसेवी संस्थाएं मिलकर इन स्थलों की सफाई में योगदान दे रहे हैं। वर्ष 2005 से अब तक हजारों वालंटियर्स 3000 से अधिक जल निकायों का कायाकल्प कर चुके हैं। इस प्रभावशाली पहल के लिए अभियान को 'राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार 2010' से सम्मानित किया गया है।2026 में, इस अभियान के तहत राजस्थान और अन्य राज्यों में विभिन्न स्थानों पर पुरानी बावड़ियों और तलाईयों को पुनर्जीवित करने का कार्य निरंतर जारी है।

Updated on:
11 May 2026 09:06 am
Published on:
11 May 2026 09:02 am