जयपुर

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी: अरावली पॉलीगोन एरिया में खनन लीज, अधिकारियों पर फर्जीवाड़े के आरोप

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर अवैध खनन लीज जारी करने और उसे ट्रांसफर करने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खान विभाग के अधिकारियों ने अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन पर लगी रोक के बावजूद न सिर्फ एग्रीमेंट किया, बल्कि विधानसभा और निदेशालय को भी गलत जानकारी देकर गुमराह किया।

2 min read
May 02, 2026
Big Mining Scam in Rajasthan
खदान और खनिज अभियंता दफ्तर (पत्रिका फाइल फोटो)

भीलवाड़ा: खनन माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा मामला सामने आया है। अधिकारियों ने न केवल उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की, बल्कि खान निदेशालय और विधानसभा तक को गलत जानकारी दी।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरावली हिल्स और पॉलीगोन में खनन गतिविधियों और नई लीज व नवीनीकरण पर रोक के बावजूद अधिकारियों ने मिलीभगत कर एक लीज का एग्रीमेंट कर दिया।

हद तो तब हो गई, जब इस विवादित लीज को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर भी कर दिया। इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ, जब ट्रांसफर के बाद नए एग्रीमेंट की फाइल चली। यह लीज पॉलीगोन क्षेत्र में आती है।

ड्राफ्टमैन ने चौंकाया, तब खुली पोल

उच्चतम न्यायालय ने 9 मई 2024 को आदेश पारित करते हुए अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में अगले आदेश तक खनन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद 25 जुलाई 2025 को खान निदेशालय ने आदेश जारी कर करेड़ा तहसील के रिछी का बाड़िया स्थित ग्रेनाइट लीज 115/2021 को दूसरे के नाम पर ट्रांसफर कर दिया।

जब एग्रीमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई, तो ड्राफ्टमैन ने नोटिंग डाल दी कि खनन पट्टा अरावली हिल्स के पोलीगोन में आता है। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।

यूं चला नियमों को ताक पर रखने का खेल

  • ग्रेनाइट लीज की स्वीकृति से लेकर ट्रांसफर तक हर कदम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।
  • खान निदेशालय ने 29 जनवरी 2024 को लीज स्वीकृत की। शर्त थी कि 3 महीने में संविदा निष्पादन करना होगा।
  • यह अवधि अप्रैल 2024 में खत्म हो गई। सक्षम अधिकारी से इसकी मियाद नहीं बढ़ाई गई।
  • 9 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन पर रोक लगा दी।
  • विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए 14 मई 2024 को ईसी जारी की।
  • 7 जून 2024 को बिना मियाद बढ़ाए एग्रीमेंट किया। 13 जून को रजिस्ट्री हुई और 4 अगस्त 2024 को सीटीओ जारी हुआ।

विधानसभा को भेजा झूठ

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निदेशालय और विधानसभा की ओर से जब भी अरावली व पॉलीगोन मामलों की जानकारी मांगी। खनिज विभाग के अधिकारी हर बार शून्य रिपोर्ट भेज गुमराह करते रहे।

दावा करते रहे कि जिले में ऐसा कोई मामला नहीं है। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को भी है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह लीज आर. रूकमणी अश्वध नाम पर दर्ज है, जबकि मौके पर खनन कार्य कोई और कर रहा है।

मामले की जांच करवाएंगे

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अगर पॉलीगोन में लीड एग्रीमेंट हुआ है तो इस मामले की जांच करवाई जाएगी। गलत होने से खनन कार्य बंद करवाया जाएगा।
-ओपी काबरा, अधीक्षण खनिज अभियंता, भीलवाड़ा

Updated on:
02 May 2026 12:02 pm
Published on:
02 May 2026 10:08 am