मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर राजस्थान में भीषण गर्मी से पहले ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए दो दिवसीय राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया गया, जिससे ग्रामीणों को सुचारू जल आपूर्ति का भरोसा मिला है।
राजस्थान में पारा चढ़ने के साथ ही पेयजल संकट की आहट को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने की अपनी प्रतिबद्धता को धरातल पर उतार रही है। इसी कड़ी में 18 और 19 अप्रैल को प्रदेशभर में एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसने ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े जल स्रोतों में फिर से जान फूंक दी है।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद राजस्थान के सभी जिलों में जिला कलक्टर, एसडीएम और जलदाय विभाग के अभियंताओं ने दफ्तर छोड़कर गांवों का रुख किया।
यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तकनीकी टीमों ने मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया। जलदाय विभाग की करीब 450 टीमों ने पूरे प्रदेश में युद्धस्तर पर कार्य किया:
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की एक-एक बूंद कीमती है। अभियान के दौरान जल जीवन मिशन के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइनों की गुणवत्ता की भी जांच की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गर्मी के मौसम में किसी भी गांव या ढाणी में टैंकरों पर निर्भरता कम की जाए और पाइपलाइन के जरिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो।
राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने ग्रीष्मकालीन कंटीन्जेंसी कार्यों को प्राथमिकता दी है। जहाँ जल स्रोत सूख गए हैं, वहाँ वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सघन निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री के इस विजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी की तपिश बढ़ने से पहले ही बुनियादी ढांचा इतना मजबूत हो जाए कि लोगों को पीने के पानी के लिए मीलों पैदल न चलना पड़े।