
जयपुर। राजस्थान में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि 19 मई को जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की रफ्तार नहीं बढ़ी। इसके बाद राजस्व विभाग को दोबारा परिपत्र जारी कर जिला कलक्टरों, एसडीओ और तहसीलदारों को कार्रवाई के निर्देश देने पड़े। इससे अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे है।नए परिपत्र में राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह जहां कानून कार्रवाई का अधिकार देता है, वहां न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा नहीं की जाए।
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों की पहचान कर तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए। जिन मामलों में कोर्ट के अंतिम या अंतरिम आदेश पहले से मौजूद हैं, उनमें भी तुरंत कार्रवाई कर अनुपालना रिपोर्ट संबंधित कोर्ट में पेश की जाए। विभाग ने नागौर के डेह और करौली के नादौती प्रकरणों का हवाला देते हुए याद दिलाया है कि ऐसे मामलों में अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन तक हो चुका है। इसके बावजूद सरकारी जमीनों पर कब्जे बने हुए हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्रवाई में लापरवाही या न्यायालय के आदेशों की अनदेखी के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। यदि किसी अधिकारी को न्यायालय ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है तो उसकी पालना करना भी अनिवार्य होगा।
जयपुरः सरकारी जमीनों पर कब्जे के कई मामले वर्षों से सामने हैं। खोह नागोरियान में तलाई की भूमि पर कॉलोनी बस गई। जयसिंहपुराखोर और जामडोली क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर कॉलोनियां और फार्म हाउस विकसित चुके हैं। जेडीए ने कुछ स्थानों पर शुरुआती कार्रवाई की, लेकिन अभियान आगे नहीं बढ़ सका।
कोटा: कोटा विकास प्राधिकरण केडीए की 1740 बीघा जमीन पर अतिक्रमण है। प्राधिकरण में शामिल 289 गांव की जमीन का सर्वे किया जा रहा है। उसके बाद अतिक्रमण चिह्नित किए जाएंगे। जिले में वन विभाग की 134 हेक्टेयर जमीन व सीएडी की 200 बीघा जमीन पर अतिक्रमण है।
उदयपुरः प्रशासन ने सरकारी जमीनों पर 10 बड़े अतिक्रमण चिन्हित किए। इनमें से 8 पर पिछले महीनों में कार्रवाई करके कब्जा मुक्त करा दिया गया।