
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने द्रव्यवती नदी में हुए अवैध अतिक्रमणों की विस्तृत जानकारी अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण को 31 अगस्त तक यह बताने के आदेश दिए हैं कि नदी की जमीन से जुड़े मामले किस-किस अदालत में और किस स्तर पर लंबित हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पी. एन. मैंदोला व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने द्रव्यवती नदी के दूषित पानी पर कहा, अब तो नदी में केवल 'द्रव्य' (कचरा/अपशिष्ट) रह गया है, 'पानी' तो बचा ही नहीं
न्यायमित्र अधिवक्ता शोभित तिवाड़ी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने गत फरवरी माह में ही विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर नदी प्रबंधन की कई गंभीर कमियों को उजागर किया था, लेकिन सरकार ने उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी है तो सरकार स्पष्ट करे, अन्यथा उस पर तुरंत अमल किया जाए। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सरकार का रुख पेश करने के लिए अदालत से और समय मांगा, जिस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार सिर्फ समय ही मांग रही है।
याचिकाकर्ता पी. एन. मैंदोला ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत को बताया कि नदी क्षेत्र के कई खसरों पर अवैध अतिक्रमण हो चुका है और जेडीए उनमें से कई का नियमन करने में जुटा है। वर्तमान में लगभग 400 से अधिक अतिक्रमण चिन्हित हैं। इस पर जेडीए ने सफाई देते हुए कहा कि प्राधिकरण द्वारा अतिक्रमणों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कई अतिक्रमणकारी विभिन्न अदालतों से स्थगन आदेश ले आते हैं। इस पर खंडपीठ ने जेडीए को सभी लंबित मुकदमों व अतिक्रमणों का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया, वहीं राज्य सरकार को न्यायमित्र की रिपोर्ट पर अपना अंतिम रिस्पॉन्स दाखिल करने के आदेश दिए।