जयपुर

द्रव्यवती नदी अतिक्रमण मामला : हाईकोर्ट ने कहा- द्रव्यवती में सिर्फ ‘द्रव्य’ ही बचा, पानी तो बचा ही नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने द्रव्यवती नदी की बदहाल स्थिति और अतिक्रमणों को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि नदी में अब सिर्फ ‘द्रव्य’ बचा है, पानी तो बचा ही नहीं। जेडीए को 31 अगस्त तक 400 से अधिक चिन्हित अतिक्रमणों और उनसे जुड़े लंबित मुकदमों की पूरी स्थिति अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
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Aug 12, 2026
rajasthan high court
Rajasthan High Court: द्रव्यवती नदी मामले पर हुई सुनवाई (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने द्रव्यवती नदी में हुए अवैध अतिक्रमणों की विस्तृत जानकारी अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण को 31 अगस्त तक यह बताने के आदेश दिए हैं कि नदी की जमीन से जुड़े मामले किस-किस अदालत में और किस स्तर पर लंबित हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पी. एन. मैंदोला व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने द्रव्यवती नदी के दूषित पानी पर कहा, अब तो नदी में केवल 'द्रव्य' (कचरा/अपशिष्ट) रह गया है, 'पानी' तो बचा ही नहीं

न्यायमित्र अधिवक्ता शोभित तिवाड़ी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने गत फरवरी माह में ही विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर नदी प्रबंधन की कई गंभीर कमियों को उजागर किया था, लेकिन सरकार ने उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी है तो सरकार स्पष्ट करे, अन्यथा उस पर तुरंत अमल किया जाए। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सरकार का रुख पेश करने के लिए अदालत से और समय मांगा, जिस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि 6 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार सिर्फ समय ही मांग रही है।

400 से अधिक अतिक्रमण चिन्हित

याचिकाकर्ता पी. एन. मैंदोला ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत को बताया कि नदी क्षेत्र के कई खसरों पर अवैध अतिक्रमण हो चुका है और जेडीए उनमें से कई का नियमन करने में जुटा है। वर्तमान में लगभग 400 से अधिक अतिक्रमण चिन्हित हैं। इस पर जेडीए ने सफाई देते हुए कहा कि प्राधिकरण द्वारा अतिक्रमणों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कई अतिक्रमणकारी विभिन्न अदालतों से स्थगन आदेश ले आते हैं। इस पर खंडपीठ ने जेडीए को सभी लंबित मुकदमों व अतिक्रमणों का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया, वहीं राज्य सरकार को न्यायमित्र की रिपोर्ट पर अपना अंतिम रिस्पॉन्स दाखिल करने के आदेश दिए।

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न्यायमित्र की रिपोर्ट में उजागर कमियां

  • अनट्रीटेड पानी का बहाव: नदी में कई स्थानों पर बिना उपचारित किया गंदा पानी सीधे छोड़ा जा रहा है, जिससे चंदलाई बांध का जल भी दूषित हो रहा है।
  • अवैध पंपिंग से खेती: दूषित जल से अवैध रूप से पंपिंग करके सब्जियों और फसलों की खेती की जा रही है।
  • रिवर फ्रंट का दुरुपयोग: रिवर फ्रंट का अनधिकृत और व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, जहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
  • एसटीपी प्लांट्स की बदहाली: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) और रिवर फ्रंट पर संसाधनों तथा नियमित सफाई का भारी अभाव है।
Updated on:
12 Aug 2026 11:05 pm
Published on:
12 Aug 2026 10:59 pm