
सीएम भजनलाल शर्मा और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। पंचायत चुनाव की हलचल के बीच गांव की चौपाल से प्रदेश की सत्ता तक पहुंचे नेताओं के सियासी सफर भी चर्चा में हैं। राजस्थान में ऐसे कई नेता रहे हैं, जिन्होंने सरपंच या पंचायत समिति सदस्य के रूप में शुरुआत की और आगे चलकर विधायक, मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री तक पहुंचे। पंचायत स्तर की राजनीति ने इन नेताओं को जमीनी मुद्दों, ग्रामीणों की समस्याओं और संगठन की बारीकियों को समझने का अवसर दिया। यही अनुभव आगे उनके राजनीतिक सफर में काम आया। गांव की गलियों से शुरू हुआ यह सफर कई नेताओं को प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति के बड़े मंच तक ले गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 2000-05 तक भरतपुर की अटारी ग्राम पंचायत के सरपंच रहे। इसके बाद भाजपा संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्री रहे। वर्ष 2023 में पहली बार सांगानेर से विधायक बने और 15 दिसंबर, 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत 2000-05 तक सिंदरू ग्राम पंचायत के सरपंच रहे। 2014-18 तक सुमेरपुर नगरपालिका के अध्यक्ष और 2018 व 2023 में सुमेरपुर से विधायक रहे। वर्ष 2023 में कैबिनेट मंत्री बने।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा 2005 और 2010 में श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के प्रधान रहे। 2013 और 2023 में विधायक बने। 2023 में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने।
हरलाल सिंह खर्रा 1957-61 तक महरौली के सरपंच और 1965-67 तक पंचायत समिति प्रधान रहे। वर्ष 1967 में पहली बार श्रीमाधोपुर से विधायक बने और पांच बार विधायक रहे। 1990 में पंचायतीराज मंत्री बने।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा 2005 में पंचायत समिति सदस्य, फिर प्रधान बने। 2008 से चार बार विधायक रहे और पिछली कांग्रेस सरकार में शिक्षा राज्यमंत्री रहे। 2020 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली 2005 में जिला प्रमुख रहे। बाद में अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बने। 2018 और 2023 में फिर से जीत दर्ज की। वे गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और वर्ष 2024 में विस में नेता प्रतिपक्ष बनाए गए।
पूर्व मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की। इसके बाद वर्ष 1982 में कोटा जिला प्रमुख बने। वर्ष 1984 में वे कोटा लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे भरत सिंह तीन बार कुंदनपुर के सरपंच और करीब 10 साल सांगोद पंचायत समिति प्रधान रहे। 1993 में पहली बार खानपुर से और बाद में दीगोद व सांगोद से विधायक रहे। इसके बाद मंत्री रहे। वर्ष 2014 में कुंदनपुर से वार्ड पंच बने।
सांसद अमराराम ने मूंडवाड़ा से सरपंच बनकर सियासी सफर शुरू किया। धोद और दांतारामगढ़ से चार बार विधायक रहे। 2024 में सीकर से चुनाव जीतकर सांसद बने।
1. उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा 2000 से 2005 तक जिला परिषद सदस्य रहे थे। उस समय दूदू पंचायत समिति के वार्ड 15 से चुनाव लड़े थे।
2. कृषि मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीना ने फरवरी 1995 में जिला परिषद सदस्य चुनाव लड़ा। 22 दिसम्बर 1998 तक दौसा के पहले जिला प्रमुख रहे थे।
संबंधित विषय:
Updated on:
05 Oct 2026 09:27 am
Published on:
05 Oct 2026 09:26 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
