
जयपुर . पर्यावरण संरक्षण के दावों और योजनाओं के बावजूद प्रदेश में पर्यावरण संबंधी अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण अभियानों के बावजूद राजस्थान में पर्यावरण संबंधी अपराध चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पर्यावरण से जुड़े 10,824 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक हैं। इनमें 39%की वृद्धि दर्ज की गई है। राजस्थान पर्यावरण संबंधी अपराधों के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता शहरीकरण, निर्माण गतिविधियों, खनन व सार्वजनिक आयोजनों के कारण पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन के मामले बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में राजस्थान में ऐसे 10,824 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 के 7,794 मामलों की तुलना में 39% अधिक हैं। वर्ष 2022 में यह संख्या 9,529 थी। पिछले तीन वर्षों में कुल 28,147 पर्यावरण संबंधी अपराध सामने आए हैं। राजस्थान में ध्वनि प्रदूषण के तहत 8,264 मामले दर्ज किए गए, जो कुल पर्यावरण अपराधों का 76% हैं। अपराध दर के मामले में राजस्थान की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
यहाँ प्रति लाख आबादी पर पर्यावरण अपराधों की दर 13.2 दर्ज की गई है। हालांकि इस मामले में तमिलनाडु (34.3) और केरल (25.4) की दर राजस्थान से अधिक है, लेकिन केरल में कुल मामले राजस्थान से कम हैं।
राजस्थान में पिछले तीन वर्षों में पर्यावरण संबंधी अपराधों के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2022 में प्रदेश में कुल 9,529 मामले दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2023 में घटकर 7,794 रह गए। हालांकि, वर्ष 2024 में इन मामलों में भारी उछाल आया और यह संख्या बढ़कर 10,824 के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई।
प्रति लाख आबादी पर पर्यावरण अपराधों की दर (क्राइम रेट) के मामले में देश के अन्य राज्यों की तुलना की जाए तो तमिलनाडु 34.3 की दर के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद केरल 25.4 की अपराध दर के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि राजस्थान में प्रति लाख आबादी पर पर्यावरण अपराधों की दर 13.2 दर्ज की गई है।