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Rajasthan Police : कोमा में है पुलिस कांस्टेबल, विभाग ने रोका वेतन, राजस्थान हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर तक मांगा जवाब

Rajasthan High Court : उस परिवार पर क्या गुजर रही होगी जिसका मुखिया पिछले कई महीनों से कोमा की हालत में जिंदगी की जंग लड़ रहा हो और पुलिस विभाग ने उसका वेतन रोक दिया हो।
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Rajasthan High Court : फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan High Court : जयपुर. उस परिवार पर क्या गुजर रही होगी जिसका मुखिया पिछले कई महीनों से अस्पताल के बेड या घर में बिस्तर पर कोमा की हालत में जिंदगी की जंग लड़ रहा हो और पुलिस विभाग ने उसका वेतन रोक दिया हो। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले पर दायर याचिका की प्रति अतिरिक्त महाधिवक्ता को दिलवाते हुए पांच अक्टूबर तक जवाब मांगा है। याचिका में प्रमुख गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और भरतपुर एसपी को पक्षकार बनाया गया है।

पुलिस कांस्टेबल जोगेन्दर सिंह की पत्नी उषा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि प्रार्थी का पति जोगेन्दर सिंह भरतपुर जिले में पुलिस कांस्टेबल के पद पर सेवारत है। वह 18 अगस्त 2024 को अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय अचानक अस्वस्थ हो गए थे। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर रेफर किया गया, जहां जांच के दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। इसके बाद से वह 90 फीसदी स्थाई निशक्त हो चुके हैं और तब से लगातार कोमा की स्थिति में हैं। वर्तमान में उनका संपूर्ण इलाज घर पर ही चल रहा है।

घर चलाने का खड़ा हुआ गंभीर आर्थिक संकट

अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि एक तरफ जहां पति की गंभीर बीमारी और इलाज के खर्च ने परिवार की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी तरफ जुलाई 2025 से विभाग ने उनका वेतन देना भी पूरी तरह बंद कर दिया है। वेतन रुकने के कारण इस दुखी परिवार के सामने दो वक्त की रोटी और घर चलाने का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

भरतपुर एसपी को सौंपा था प्रार्थना पत्र, विभाग के सुस्त

प्रार्थी और उसके बेटे ने अपनी इस दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए भरतपुर एसपी को प्रार्थना पत्र भी सौंपा था और बकाया वेतन का भुगतान करने गुहार लगाई थी, ताकि वे अपने पति का इलाज जारी रख सकें। लेकिन पुलिस विभाग के सुस्त और असंवेदनशील रवैये के चलते उन्हें अभी तक कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें मजबूरन न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।