वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को फंसाया गया है। एसीबी में दर्ज मूल केस में याचिकाकर्ता का नाम ही नहीं था।
पूर्व मंत्री महेश जाेशी ने जल जीवन मिशन मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश एजी मसीह की खंडपीठ ने जमानत के लिए महेश जोशी की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर यह आदेश दिया।
इसमें हाईकोर्ट के जमानत याचिका खारिज करने के 26 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को फंसाया गया है। एसीबी में दर्ज मूल केस में याचिकाकर्ता का नाम ही नहीं था। ईडी ने नोटिस देने के एक साल बाद बिना परिस्थिति बदले उसे अप्रेल माह में गिरफ्तार कर लिया।
ईडी के पास 2.01 करोड़ रुपए के लेन-देन का भी कोई साक्ष्य नहीं है। परिवादी राशि कहां से लाया, उसका भी उल्लेख नहीं है। ईडी बेटे की फर्म में 50 लाख रुपए आने की बात कह रही है, जो लोन के रूप में आई और उसे लौटा भी दिया। इस राशि को लेकर सिविल केस भी लंबित है। इसके बावजूद भी हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। ऐसे में उसे जमानत का लाभ दिया जाए।
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दरअसल, 900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में 24 अप्रैल को ED ने महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। ईडी की ओर से प्रकरण में एसीबी की ओर से दर्ज अन्य एफआईआर में महेश जोशी की भूमिका को बताया गया है।