जयपुर

राजस्थान में गैस सिलेंडर के लिए हाहाकार: स्कूलों में सप्लाई रोकी, हजारों रेस्टोरेंट्स और मैस में मचा हड़कंप, जानें ताजा हालात

Gas Cylinder Crisis: राजस्थान में गैस सिलेंडर संकट गहराता जा रहा है। टोंक में भारत गैस एजेंसी ने सरकारी स्कूलों के पोषाहार के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोक दी, जिससे भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जयपुर, अलवर और कोटा में सिलेंडर की कमी व कालाबाजारी के आरोप लगे।

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Mar 11, 2026
Gas Cylinder Crisis in Rajasthan (Patrika Photo)

Gas Cylinder Crisis in Rajasthan: राजस्थान में रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने अब विकराल रूप ले लिया है। आलम यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का निवाला छिनने की नौबत आ गई है, तो वहीं शहरों में घरेलू गैस के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जयपुर से लेकर कोटा और अलवर तक, गैस एजेंसियों पर हंगामे और तालाबंदी की खबरें सामने आ रही हैं।

टोंक जिले से सबसे चिंताजनक खबर आई है। यहां 'बुंदेल गैस एजेंसी' ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (पोषाहार) के लिए दी जाने वाली कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी है। एजेंसी संचालक का दावा है कि कंपनी के मौखिक आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है। इससे हजारों बच्चों के खाने पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, प्रशासन अभी इस मामले में अन्य एजेंसियों से वैकल्पिक व्यवस्था की उम्मीद कर रहा है।

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अलवर और जयपुर में भारी हंगामा, मालिक ने खुद को किया लॉक

अलवर में बुधवार सुबह मॉडर्न गैस सर्विस पर तब भारी बवाल हो गया, जब ग्राहकों को घरेलू सिलेंडर देने से मना कर दिया गया। गुस्साई भीड़ ने एजेंसी मालिक पर कालाबाजारी के आरोप लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि मालिक को जान बचाने के लिए खुद को ऑफिस के अंदर बंद करना पड़ा।

राजधानी जयपुर के त्रिवेणी नगर और आसपास के इलाकों में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं। 2500 से अधिक में एक सिलेंडर बेचा जा रहा है। रेस्टोरेंट संचालकों का आरोप है कि सप्लायर खुलेआम 700 तक की अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं।

कोटा में मैस बंद, सीकर में चार दिन से सप्लाई ठप

कोचिंग सिटी कोटा में कॉमर्शियल गैस की कमी का असर छात्रों पर पड़ रहा है। कई हॉस्टल और मैस संचालकों ने सिलेंडर न मिलने के कारण खाना बनाना बंद कर दिया है। वहीं, सीकर के गोरिया गांव जैसे ग्रामीण इलाकों में पिछले चार दिनों से एक भी सिलेंडर नहीं पहुंचा है, जिससे ग्रामीण दाने-दाने को तरस रहे हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन

बिगड़ते हालात और जमाखोरी की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। सरकार ने अब गैस सप्लाई को चार मुख्य श्रेणियों में बांटकर प्राथमिकता तय की है।

कैटेगरीकिसे मिलेगी गैस?सप्लाई का कोटा
पहली श्रेणीघरेलू रसोई गैस (PNG) और वाहनों की CNG100% (पूरी सप्लाई)
दूसरी श्रेणीखाद (Fertilizer) कारखाने70% तक
तीसरी श्रेणीचाय बागान और बड़े उद्योग80% तक
चौथी श्रेणीछोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंटपुरानी खपत का 80%

क्या वाकई राजस्थान में गैस की कमी है?

जानकारों का मानना है कि यह संकट सप्लाई चेन में आई बाधा और कुछ स्तर पर की जा रही कृत्रिम किल्लत का नतीजा है। जहां एक ओर कंपनियां उत्पादन और डिस्ट्रीब्यूशन का हवाला दे रही हैं। वहीं, धरातल पर सप्लायर अधिक मुनाफे के चक्कर में कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर केंद्र के नए नियमों का सख्ती से पालन हुआ, तो घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए आने वाले दिन और भी महंगे हो सकते हैं।

आम जनता पर असर

  • महंगाई की मार: होटलों में खाने की थाली महंगी हो सकती है।
  • कालाबाजारी: 1100-1200 का सिलेंडर 2500 तक पहुंचना मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रहा है।
  • शिक्षा और पोषण: मिड-डे मील रुकने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की उपस्थिति पर असर पड़ेगा।

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Published on:
11 Mar 2026 02:52 pm
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