PM Modi VS Manmohan Singh Economic Policy: "सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 15% होने और पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील पर जयपुर के ज्वेलर्स ने बड़ा बयान दिया है। क्या मनमोहन सिंह का आर्थिक मॉडल आज के संकट का सही समाधान है? जानिए पूरी सच्चाई।"
Gold Import Duty Hike 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। सोने पर बढ़ती इंपोर्ट ड्यूटी और सरकार द्वारा खरीदारी कम करने की अपील ने देशभर के सर्राफा बाजारों में हलचल मचा दी है। राजस्थान की राजधानी और देश के 'रत्न केंद्र' जयपुर के ज्वेलरी बाजार में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। यहाँ के अनुभवी ज्वेलर्स और अर्थशास्त्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के मौजूदा कदमों की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ऐतिहासिक आर्थिक नीतियों से की है।
हाल ही में सोने पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) की बचत होगी और रुपया मजबूत होगा। इसके साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे निवेश के लिए सोना खरीदने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करें। तीन पीढ़ी से कारोबार कर रहे जयपुर के ज्वेलर भीम जैन ने बताया कि "ड्यूटी बढ़ने से सोने की कीमतों में रातों-रात 10,000 रुपये तक का उछाल आया है। इससे न केवल ग्राहकों की क्रय शक्ति कम हुई है, बल्कि हजारों कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। शेयर बाजार में आई गिरावट भी यह संकेत दे रही है कि निवेशक डरे हुए हैं।"
सर्राफा समिति बड़ी चौपड़ के मंत्री अश्विनी तिवारी ने बताया कि आर्थिक संकट के समय डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा अपनाए गए मॉडल को आज फिर से याद किया जा रहा है। 1991 के संकट के दौरान उन्होंने 'डिमांड रोकने' के बजाय 'आपूर्ति और निर्यात' बढ़ाने पर जोर दिया था:
1. निर्यात पर 100% छूट: उन्होंने एक्सपोर्ट से होने वाली आय को टैक्स फ्री कर दिया था, जिससे विदेशी मुद्रा की बाढ़ आ गई थी।
2. गिफ्टिंग अधिकार: बिना ब्लड रिलेशन के भी विदेशी मुद्रा या उपहार पाने के नियमों को सरल बनाया गया था।
3. रुपये का संतुलन: उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रुपये का सही मूल्य निर्धारण (Devaluation) किया, जिससे पर्यटन और विदेशी निवेश बढ़ा।
गोपाल जी का रास्ता में कारोबार करने वाले लेखराज जैन ने कहा कि केवल ड्यूटी बढ़ाकर या जनता को सोना खरीदने से रोककर आर्थिक संकट का समाधान नहीं निकाला जा सकता। उनके अनुसार:
* व्यापार पर चोट: सोना-चांदी सेक्टर भारत में लाखों लोगों को रोजगार देता है। एक साल तक खरीद रोकने की अपील इस पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त कर सकती है।
* कालाबाजारी का डर: जब ड्यूटी बहुत ज्यादा (15%) हो जाती है, तो सोने की स्मगलिंग (तस्करी) बढ़ने का खतरा रहता है।
* विकल्प की तलाश: सरकार को पेट्रोल की बचत, राजनीतिक फिजूलखर्ची पर रोक और 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे कदमों के साथ-साथ निर्यातकों को मनमोहन सिंह के दौर की तरह इंसेंटिव देने चाहिए।