Gig Workers Good News : गुड न्यूज। जयपुर में गिग इकोनॉमी तेज गति से उभरी है। तीन वर्ष पहले गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 50 हजार थी, जो अब बढ़कर दो लाख से अधिक हो चुकी है। क्विक कॉमर्स, कैब सेवाएं और वर्क फ्रॉम होम मॉडल से भी रोजगार बढ़ा।
Gig Workers Good News : गुड न्यूज। पिछले कुछ वर्षों में जयपुर में गिग इकोनॉमी तेज गति से उभरी है। तीन वर्ष पहले गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 50 हजार थी, जो अब बढ़कर दो लाख से अधिक हो चुकी है। ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स, कैब सेवाएं और वर्क फ्रॉम होम मॉडल ने शहर के रोजगार को नया आकार दिया है।
ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी की बढ़ती मांग ने गिग वर्कर्स को नई ऊर्जा दी है। जयपुर में मानसरोवर, जगतपुरा, वैशाली नगर, मालवीय नगर और प्रतापनगर जैसे इलाकों में फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं, ई-कॉमर्स वेयरहाउस और डार्क स्टोर्स में पैकिंग, डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े काम भी बढ़े हैं।
वर्क फ्रॉम होम कल्चर ने भी गिग इकोनॉमी को मजबूती दी है। कॉल सेंटर, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एंट्री, कंटेंट राइटिंग और ग्राफिक डिजाइन जैसे काम अब घर से किए जा रहे हैं।
गिग वर्कर्स की औसत मासिक कमाई 12 हजार से 25 हजार रुपए के बीच है, जो काम के घंटे और प्लेटफॉर्म पर निर्भर करती है। फूड और क्विक डिलीवरी से जुड़े वर्कर्स रोजाना 8 से 10 घंटे काम कर औसतन 500 से 900 रुपए तक कमा लेते हैं। त्योहारी सीजन और वीकेंड पर यह कमाई और बढ़ जाती है। वहीं, डिजिटल फ्रीलांसर प्रोजेक्ट आधारित काम से 20 से 40 हजार रुपए तक भी कमा रहे हैं।
जयपुर में कई डिलीवरी वर्कर्स ने कम मजदूरी, प्रतिदिन डिलीवरी लक्ष्य और अन्य समस्याओं के खिलाफ हड़ताल की है। कुछ ने विरोध स्वरूप ऐप्स भी बंद कर दिए।
गिग इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने के साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। गिग वर्कर्स को स्थायी नौकरी की सुरक्षा, पीएफ, ईएसआइ और हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। ईंधन की बढ़ती कीमतें, ट्रैफिक, मौसम और लंबे काम के घंटे डिलीवरी वर्कर्स के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जयपुर में गिग इकोनॉमी और मजबूत होगी। ई-कॉमर्स विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग से नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम संरक्षण की दिशा में ठोस नीति बनाना उतना ही जरूरी है।
1- 2.35 करोड़ तक पहुंच सकती देश में गिग वर्कर्स की संख्या 2029-30 तक।
2- 77 लाख थी गिग वर्कर्स की संख्या 2020-21 में भारत में।
3- 2 से 2.5 लाख गिग वर्कर्स फिलहाल काम कर रहे जयपुर में।
(नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक)
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