Good News : खुशखबर। भजनलाल सरकार राजस्थान की नौकरीपेशा महिलाओं के लिए सरकारी पेइंग गेस्ट हाउस बना रही है। हालांकि इसके लिए निश्चित शुल्क चुकाना होगा। जानिए कितना शुल्क देना होगा।
Good News : राजस्थान में घर से दूर शहरों में नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए राहत की खबर है। इन महिलाओं के लिए सरकार 'पेइंग गेस्ट हाउस' की तर्ज पर कामकाजी महिला छात्रावास बना रही है। जहां महिलाओं को पेइंग गेस्ट हाउस के जैसे रहने और खाने की सुविधा मिलेगी। हालांकि इसके लिए निश्चित शुल्क चुकाना होगा। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में ये छात्रावास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने बजट 2024-25 में छात्रावास बनाने की घोषणा की थी। कामकाजी महिला निवास योजना के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ये छात्रावास बनवा रहा है। कुछ जिलों में भवन बनाने का काम भी शुरू हो चुका है।
जयपुर में भी सीतापुरा क्षेत्र में यह छात्रावास बनेगा, इसके लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। जमीन का अलॉटमेंट लेटर मिलते ही छात्रावास बनाने का काम शुरू होगा। जयपुर सहित 7 संभाग मुख्यालयों पर 100-100 महिलाओं के रहने की क्षमता का छात्रावास बनेगा, जबकि अन्य जिला मुख्यालयों पर 50-50 महिलाओं के रहने की क्षमता का छात्रावास तैयार होगा। इन छात्रावास का किराया एक हजार रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक होगा। कामकाजी महिलाएं कम से कम 3 वर्ष और अधिकतम 5 साल तक रह सकती हैं।
इन छात्रावासों में सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों, निजी संस्थानों व प्रतिष्ठानों में काम करने वाली महिलाएं रह सकेंगी। पर उनका मासिक वेतन 50 हजार रुपए से कम होना चाहिए। इसके अलावा स्वयं का छोटा व्यवसाय करने वाली महिलाएं भी रह सकेंगी।
छात्रावास में भोजन (मैस), एयर कंडीशनर, गीजर, पानी-बिजली की सुविधा होगी। इसके अलावा चिकित्सा सुविधा के साथ ही बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच भी होगा। हालांकि इन सभी सुविधाओं के लिए अलग से शुल्क देना होगा।
शयन कक्ष - संभाग मुख्यालय - जिला मुख्यालय
2 सीटर - 5 हजार - 3 हजार रुपए
4 सीटर - 3 हजार - 2 हजार रुपए
6 सीटर - 2 हजार - एक हजार रुपए
इन छात्रावासों के लिए 165.32 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। छात्रावासों का निर्माण राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड करवा रहा है। बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग खर्च कर रहा है।
छात्रावास बनाने का काम शुरू हो गया है। अगले साल बनकर तैयार हो जाएगा। इस पर करीब 165 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। नौकरी के लिए शहरों में रहने वाली एकल महिलाओं को इसका अधिक फायदा मिलेगा।
आशीष मोदी, निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग