
- आनंद यादव
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे के साथ ही अब प्रदेश की बेटियां सफलता के नए आयाम छू रही हैं। बात फाइटर प्लेन उड़ाने की हो या फिर मुक्तिधाम में क्रियाकर्म कराने की, समाज के सभी क्षेत्रों में पुरुष एकाधिकार वाले काम महिलाएं बखूबी कर रही हैं। राजधानी के एक मुक्तिधाम का रखरखाव और क्रियाकर्म जैसा काम भी एक महिलाकर्मी ने बिना सरकारी मदद के संभाल रखा है।
महिला को क्रियाकर्म निपटाते देख लोग होते हैं हैरान
मुक्तिधाम में रात के अलावा दिन में भी जाने में जहां एक सामान्य व्यक्ति को भय लगता है। वहां एक महिला की बेखौफ आवाजाही और अंतिम क्रियाकर्म निपटाने की प्रक्रिया को देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।
37 साल में कराए 34 हजार दाह संस्कार
शहर का पॉश इलाका है त्रिवेणी नगर और कॉलोनी के एक कोने में बने मुक्तिधाम की सार संभाल और दाह संस्कार के लिए जरूरी संसाधन जुटाने का जिम्मा यहां रहने वाली मायादेवी ने संभाल रखा है। मायादेवी की बात पर यदि यकीन करें तो वे अब तक बीते 37 साल में करीब 34 हजार दाह संस्कार करा चुकी हैं।
पहले मां करती थी ये काम
मुक्तिधाम को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर उन्होंने कहा क्या करें परिवार का पालन पोषण करने का जिम्मा ही उन्हें इस काम में ले आया। यहां पहले उनकी मां गुलाब देवी यह काम करती थी और अब यह काम वह कर रही है। समाज में लोग आज भी इस काम को लेकर बहुत अच्छी राय नहीं रखते और उन्हे स्थानीय प्रशासन और लोगों से कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिलती। बस परिवार का पालन पोषण अंतिम संस्कार जैसे रीति रिवाज पर टिका हुआ है।