जयपुर

जयपुर अमायरा सुसाइड केस: पुलिस चार्जशीट में बड़े खुलासे, बार-बार शिकायत के बावजूद टीचर्स क्यों रहीं मूकदर्शक?

Amyra Suicide Case: जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा सुसाइड केस में पुलिस चार्जशीट ने नए खुलासे किए हैं। सीसीटीवी में छात्रा को परेशान किए जाने और टीचर्स द्वारा शिकायत नजरअंदाज करने का दावा है। चार्जशीट में सबूतों से छेड़छाड़ और 'ड्यूटी ऑफ केयर' में लापरवाही का भी उल्लेख किया गया है।
3 min read
• •
Updated: 19 Jul 2026, 7:16 PM IST
Amyra Suicide Case
Amyra (Patrika Photo)

Amyra Suicide Case Update News: राजधानी जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा अमायरा सुसाइड केस में पुलिस की चार्जशीट ने पूरे मामले को एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ दे दिया है। चार्जशीट में स्कूल प्रशासन और टीचर्स की एक ऐसी संवेदनहीनता और लापरवाही सामने आई है, जिसने न सिर्फ कानून, बल्कि इंसानियत को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सीसीटीवी फुटेज का चौंकाने वाला सच

पुलिस चार्जशीट में सबसे पहला और बड़ा खुलासा स्कूल के सीसीटीवी फुटेज को लेकर हुआ है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल के कुछ बच्चे अमायरा को लगातार परेशान कर रहे थे। परेशान होकर अमायरा बार-बार अपनी टीचर्स के पास मदद के लिए जाती है। वह गुहार लगाती है कि उसे बचाया जाए, लेकिन टीचर्स हर बार उसे नजरअंदाज कर देती हैं।

यह लापरवाही सिर्फ 1 नवंबर (जिस दिन अमायरा ने आत्महत्या की) को ही नहीं हुई थी। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 31 अक्टूबर को भी अमायरा ने अपनी टीचर्स से मिलकर शिकायत की थी। अगर टीचर्स ने 31 अक्टूबर को ही उसकी बात सुन ली होती और सख्त कदम उठाया होता, तो शायद आज अमायरा हमारे बीच होती। चार्जशीट में पुलिस ने स्कूल और टीचर्स को 'ड्यूटी ऑफ केयर' (देखभाल की जिम्मेदारी) के उल्लंघन का दोषी माना है।

क्या है 'ड्यूटी ऑफ केयर'?

कानूनन और नैतिक रूप से जब कोई अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल भेजता है तो स्कूल के समय में उस बच्चे की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन और टीचर्स की होती है। टीचर्स बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने और उन्हें सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल साबित हुए। चार्जशीट बताती है कि अमायरा के मानसिक तनाव को देखने के बावजूद टीचर्स ने कोई सुध नहीं ली।

सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़

इस मामले में स्कूल प्रशासन की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि नियमानुसार स्कूल के पास जो अनिवार्य सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित होना चाहिए था, वह गायब है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। सबूतों को मिटाने और छुपाने के प्रयास के तहत अब स्कूल प्रबंधन पर कानूनी धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। यह साफ दिखाता है कि स्कूल अपनी गलती छुपाने के लिए किस हद तक जा सकता है।

इंसानियत को शर्मसार करने वाला सबसे बड़ा खुलासा

चार्जशीट में जो सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात सामने आई है, वह अमायरा के सुसाइड के ठीक बाद की है। जब अमायरा यह आत्मघाती कदम उठा लेती है, तो स्कूल के दूसरे बच्चे दौड़कर इसकी खबर क्लास टीचर को देते हैं। एक सामान्य इंसान या शिक्षक का फर्ज होता है कि वह तुरंत मौके पर भागे और बच्ची की जान बचाने की कोशिश करे।

लेकिन चार्जशीट के मुताबिक, खबर सुनने के बाद भी टीचर के चेहरे पर कोई शिकन नहीं आई। उन्होंने न तो कोई तुरंत रिएक्शन दिया और न ही अमायरा के पास जाने की जहमत उठाई। यह घटना दिखाती है कि इतने बड़े और नामी स्कूल के टीचर्स के अंदर की इंसानियत किस कदर मर चुकी थी।

परिवार को न्याय का इंतजार

जयपुर का नीरजा मोदी स्कूल शहर के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित स्कूलों में गिना जाता है। अभिभावक लाखों रुपए की फीस सिर्फ इसलिए देते हैं, ताकि उनके बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें। लेकिन इस केस ने यह साबित कर दिया है कि बड़ी इमारतें और महंगी फीस बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं।

अमायरा की आत्महत्या को आठ महीने से अधिक हो चुके हैं। इतने बड़े और पुख्ता खुलासे होने के बावजूद, पीड़ित परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। अब तक स्कूल प्रशासन या दोषी टीचर्स पर कोई ऐसा सख्त एक्शन नहीं लिया गया है, जो समाज में एक मिसाल बन सके।

मामले में बड़ा सवाल?

  • क्या इस चार्जशीट के सामने आने के बाद राजस्थान पुलिस और प्रशासन कोई कड़ा कदम उठाएगा?
  • क्या अमायरा के गुनहगारों को जेल होगी?
Updated on:
19 Jul 2026, 7:16 PM IST
Published on: