Jaipur Factory Blast: जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसे के फरार आरोपी कयूम और याकूब पर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सरकारी जमीन पर कब्जा कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों की जमीन बेचने के आरोप सामने आए हैं। खोह नागोरियान में अवैध कॉलोनियां बसाने और बैक डेट में पट्टे जारी कराने के मामलों की भी जांच चल रही है।

Jaipur firecracker factory blast: जयपुर: करीम नगर तलाई के जिस मकान में हादसा हुआ, उसके मकान मालिक कयूम और दाऊद नगर में पकड़ी गई फैक्ट्री के संचालक याकूब पर जमीन कब्जाने के आरोप भी लगे हैं। सूर्य नगर, गलता गेट निवासी सुरेश निर्वाण ने नागोरियान थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, उसने वर्ष 2019 में खसरा नंबर-1514 स्थित पांच बीस्वा भूमि मल्का बानो से 45 लाख रुपए में खरीदी थी। पूरी राशि देने के बाद उसे जमीन का कब्जा और मूल दस्तावेज सौंप दिए गए थे।
बाद में उसने जमीन पर बने दो कमरे किराए पर दे दिए। पीड़ित का आरोप है कि 19 सितंबर 2025 को मल्का बानो, याकूब, कयूम, मेहराज और अन्य लोगों ने प्लॉट पर पहुंचकर कब्जा कर लिया। विरोध करने पर गाली-गलौज, धक्का-मुक्की की गई और मुकदमा वापस लेने की धमकी दी गई। शिकायत में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने का भी आरोप लगाया गया है। घटनाक्रम और खोह नागोरियान क्षेत्र में जमीनों की खरीद-फरोख्त में नियमों के उल्लंघन के मामलों ने लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
हादसे की जांच के दौरान पुलिस ने कयूम और याकूब की तलाश तेज कर दी है। जांच एजेंसियां दोनों के संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों की जानकारी जुटा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, याकूब अपने परिवार के साथ कश्मीर गया हुआ बताया जा रहा है, जबकि कयूम की भी लगातार तलाश की जा रही है।
खोह नागोरियान क्षेत्र में मौत की फैक्ट्री चलाने वाले असल में भूमाफिया भी हैं। तालाब की सरकारी जमीन पर अपने स्तर पर कॉलोनी सृजित कर ली और प्लॉट बेचकर करोड़ों रुपए कमा लिए। हैरानी की बात यह है कि कुछ स्थानीय लोगों ने खोह नागोरियान थाने और जेडीए में शिकायत की, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हुई। कयूम, याकूब और नदीम ने फर्जी तरीके से सोसाइटी बनाकर करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन बेच दी।
करीम नगर में हादसा हुआ, वह और उसके आसपास करीब आधा दर्जन से अधिक कॉलोनी अवैध रूप से सृजित की गई हैं। इनमें करीम नगर, दाउद नगर से लेकर गुलशन विहार-प्रथम और द्वितीय शामिल हैं। कुछ कॉलोनी निजी खातेदारी की भूमि पर सृजित है। राजस्व मंडल ने इस प्रकरण में साफ निर्देश दिए हैं कि नदी, नाले, तालाब और जल निकासी क्षेत्र की भूमि पर खातेदारी अधिकार कानून सम्मत नहीं है।
राजस्थान पत्रिका की टीम ने गुरुवार को मौके पर जाकर पड़ताल की तो कई कॉलोनियों में 20 से अधिक मकानों के काम चल रहे थे। तलाई क्षेत्र में डुप्लेक्स भी बने हैं। हालांकि, अभी तक इनको बेचा नहीं गया है, सभी पर ताला था।
लोगों ने स्वीकार किया कि यहां तलाई क्षेत्र में जमीन के भाव 20 से 25 हजार रुपए प्रति वर्ग गज हैं। वहीं, निजी खातेदारी की जमीन पर विकसित हो रहीं कॉलोनियों में भाव 35 से 38 हजार रुपए प्रति वर्ग गज हैं। लोगों ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 में शिकायत की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
कयूम, याकूब और नदीम ने मिलकर जमीन हड़पने का खेल शुरू किया। फर्जी दस्तावेज से बैक डेट में भूखंड सृजित किए और लोगों को पट्टे जारी करवाए। वर्ष 1997 के पट्टे सूरजपोल गृह विकास सहकारी समिति लिमिटेड, जयपुर को जारी हुए। पड़ताल में सामने आया कि जो राशि भूखंडधारियों से ली गई, उस रसीद पर अध्यक्ष-मंत्री और कोषाध्यक्ष पद पर एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं।
हादसे के बाद तीसरे दिन गुरुवार को भी हालात सामान्य नहीं हो सके। पुलिस का पहरा है, कई घरों पर ताले लटके हैं और सूनी गलियां उस भयावह दिन की याद दिला रही है। सील किए गए मकान के सामने से गुजरने वाला हर व्यक्ति कुछ पल के लिए ठहर जाता है।
यह इलाका आज भी जवाब तलाश रहा है कि आखिर ऐसी लापरवाही की कीमत निर्दोष लोगों को ही क्यों चुकानी पड़ी। स्थानीय लोग खुलकर बात करने से बच रहे हैं। कई लोग पुलिस कार्रवाई और पूछताछ के डर से कैमरा देखते ही दरवाजे बंद कर लेते हैं। जो लोग बात करते भी है, वे नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त रखते हैं। गलियों में कदम रखते ही लोगों के चेहरों पर हादसे का खौफ साफ दिखाई देता है।
जिस मकान में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण होता था, वहां अब पुलिस की सील लगी है। आसपास के कई परिवार घरों पर ताला लगाकर रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। लोगों को डर है कि कहीं आसपास ऐसे और गोदाम या फैक्ट्रियां तो संचालित नहीं हो रहीं।