Jaipur Fake Paneer : जयपुर में पनीर अब स्वाद से ज्यादा खतरे की बड़ी वजह बनता जा रहा है। जयपुर में पनीर की सैकड़ों अवैध यूनिट हैं। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में 3,915 से अधिक कानूनी मामले दर्ज किए।
Jaipur Fake Paneer : राजधानी जयपुर में लोगों की थाली में परोसा जा रहा पनीर अब स्वाद से ज्यादा खतरे का कारण बनता जा रहा है। शादी समारोहों, ढाबों, रेस्तरां और फास्ट फूड सेंटरों में बड़े स्तर पर 'कृत्रिम पनीर' की खपत हो रही है। शहर में ही मार्च‑अप्रेल में 700 से 1000 किलो तक नकली पनीर की कई खेप पकड़ी गई हैं। 2025‑26 के आंकड़ों के अनुसार, दूध और पनीर के नमूनों में 97 प्रतिशत तक मिलावट पानी, डिटर्जेंट और यूरिया की पाई गई है।
जयपुर में पनीर की सैकड़ों अवैध यूनिट हैं। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में 3,915 से अधिक कानूनी मामले दर्ज किए। इनमें पनीर सहित दूध उत्पादों के हजारों नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें बड़ी संख्या असुरक्षित पाई गई। पनीर के 70 प्रतिशत से अधिक सैंपल फेल पाए गए, जिनमें पाम ऑयल और स्टार्च की मिलावट सामने आई। जयपुर और आसपास के इलाकों में मिलावटी पनीर मुख्य रूप से हरियाणा की सीमा (मेवात क्षेत्र) से जयपुर, जोधपुर और अलवर में सप्लाई हो रहा है।
असली पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है, जिसमें प्राकृतिक प्रोटीन, कैल्शियम और फैट मौजूद रहता है। कृत्रिम पनीर में दूध की मात्रा बेहद कम या कई बार बिल्कुल नहीं होती। इसे सिंथेटिक फैट, पाम ऑयल, स्टार्च, स्किम्ड पाउडर, डिटर्जेंट और सफेदी बढ़ाने वाले रसायनों से तैयार किया जाता है। कई जगह इसे सख्त बनाने के लिए रबर जैसी बनावट देने वाले पदार्थ भी मिलाए जाते हैं।
कृत्रिम पनीर देखने और स्वाद में असली जैसा लगता है, इसलिए उपभोक्ता आसानी से पहचान नहीं कर पाता। कम कीमत के कारण छोटे होटल, ढाबे और कैटरिंग संचालक बड़े पैमाने पर इसका उपयोग कर रहे हैं। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार देश में कृत्रिम पनीर पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है।
चिंताजनक बात यह है कि इस कारोबार पर रोक लगाने के बजाय अधिकतर मामलों में केवल जुर्माना लगाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाती है। इससे नकली पनीर बनाने और बेचने वालों के हौसले बुलंद हैं। प्रदेश में फूड सेफ्टी विभाग की जांचों में कई लाइसेंसधारी कारोबारी भी हैं, जबकि सैकड़ों बिना लाइसेंस यूनिट शहरों और कस्बों के बाहरी इलाकों में संचालित होने की आशंका है। खुद फूड कमिश्नरेट के पास भी इस नेटवर्क का सटीक आंकड़ा नहीं है।
1- पनीर में फैट और प्रोटीन की मात्रा मानक से कम, स्टार्च और सिंथेटिक फैट की मिलावट
2- अधिकांश कार्रवाई आर्थिक जुर्माने तक सीमित, गंभीर मामलों में एफआईआर और जेल की कार्रवाई बेहद कम
3- 200‑250 रुपए किलो बिकने वाला सस्ता पनीर संदिग्ध, असली दूध से बने पनीर की लागत इससे अधिक
4- होटल, ढाबों, कैटरर्स और फास्ट फूड सेंटरों में बड़े पैमाने पर “एनालॉग पनीर” उपयोग की आशंका
5- गर्मियों में दूध जल्दी खराब होने से सिंथेटिक और केमिकल बेस्ड उत्पादों का उपयोग बढ़ता है
6- कृत्रिम पनीर तलने पर जल्दी रबर जैसा सख्त हो जाता है, असली पनीर नरम रहता है
7- उपभोक्ता स्तर पर गर्म पानी और आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की मिलावट का प्राथमिक अंदाजा लगाया जा सकता है, अंतिम पुष्टि लैब जांच से ही संभव
लंबे समय तक ऐसा पनीर खाने से पेट संक्रमण, लिवर और किडनी पर असर, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है। मिलावटी फैट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।
डॉ. सुधीर महर्षि, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। 500 से 1000 किलो मिलावटी पनीर पकड़े जाने के मामले सामने आए हैं।
डॉ. रवि शेखावत, जयपुर प्रथम सीएमएचओ
कृत्रिम पनीर जैसा कुछ नहीं होता। एनालॉग व डेयरी उत्पाद पनीर के पूरे प्रदेश में 32 हजार लाइसेंसधारी कारोबारी हैं। इनमें से रेंडमली और शिकायत के आधार पर जांच की जाती है।
भगवत सिंह, अतिरिक्त आयुक्त, खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय