जयपुर में महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन जेडीए व नगर निगम के नाम करने पर विवाद बढ़ा। भाजपा, कांग्रेस और आरएलडी ने इसे अवैध बताते हुए नामांतरण रद्द करने व दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। विपक्ष ने कहा, इससे कॉलेजों की ऐतिहासिक पहचान और स्वायत्तता पर खतरा है।
जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन को जेडीए और नगर निगम को हस्तांतरित करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसकी गूंज सोमवार को विधानसभा में भी रही। भाजपा के कालीचरण सराफ, कांग्रेस के मनीष यादव और आरएलडी के सुभाष गर्ग ने इस मामले में सरकार को घेरा। साथ ही इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि जयपुर के महाराजा कॉलेज की 48 बीघा 10 बिस्वा और महारानी कॉलेज की 29 बीघा 17 बिस्वा भूमि का नामांतरण जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम के नाम कर दिया गया, जो अवैध है। यदि यह भूमि संबंधित महाविद्यालयों के नाम विधिवत सुरक्षित नहीं की गई तो भविष्य में इसके व्यावसायिक उपयोग, नीलामी की आशंका से इन संस्थानों की ऐतिहासिक पहचान और स्वायत्तता पर संकट खड़ा हो सकता है।
सुभाष गर्ग ने कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर जेडीए और नगर निगम के नाम कर दिया। हमारे लिए यह धब्बा है और शर्मनाक स्थिति है। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए और जिस अधिकारी ने यह किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
मनीष यादव ने मांग की, कि नामांतरण तत्काल निरस्त कर महाविद्यालयों की भूमि दोबारा उनके नाम दर्ज की जाए, ताकि प्रदेश की शैक्षणिक विरासत, गौरव और स्वायत्त अस्तित्व सुरक्षित रह सके। इस निर्णय से विद्यार्थियों और शिक्षाविदों में रोष व्याप्त है।
सूचना केंद्र के सामने टोंक रोड से जेएलएन मार्ग को जोड़ने वाले आरोग्य पथ को चौड़ा करने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है। मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तैयार किए जा रहे आईपीडी टावर की पार्किंग के लिए अब तक जगह चिन्हित नहीं हो पाई है। जेडीए अधिकारियों का दावा है कि सवाई मानसिंह अस्पताल परिसर में ही पार्किंग बनाई जाएगी।
हालांकि, महाराजा कॉलेज के ग्राउंड में भूमिगत पार्किंग का भी विचार चल रहा है। मैदान और एसएमएस परिसर के बीच आरोग्य पथ अभी 50 फीट है। इसे 100 फीट करने का भी विचार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की सिंडीकेट में यह मामला आया था, लेकिन प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया था।
विश्वविद्यालय सिंडिकेट इसका की एक विशेष बैठक की जाए और राजभवन व राजस्थान सरकार को विरोध स्वरूप एक प्रस्ताव पारित कर भेजा जाए। उन्होंने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़ी किसी भी संपदा का स्थानांतरण किसी दूसरी संस्था को किए जाने से पूर्व विश्वविद्यालय सिंडिकेट की अनुमति अनिवार्य रूप से आवश्यक है, लेकिन इन दोनों महाविद्यालयों के स्वामित्व का हस्तांतरण जेडीए व नगर निगम को किए जाने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई जानकारी नहीं दी गई।
-प्रो. सोमदेव, अध्यक्ष, विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन
-कॉलेजों की ऐतिहासिक पहचान और स्वायत्तता पर असर
-भविष्य में व्यावसायिक उपयोग और नीलामी की आशंका