
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपनी मांगों को मनवाने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। कुछ दिन पहले छात्र नेताओं के टंकी पर चढ़ने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब 3 संविदा नर्सेज नेता जयपुरिया अस्पताल के नजदीक एक पानी की टंकी पर चढ़ गए हैं। इन नेताओं में बिमल शर्मा, रॉबिन शर्मा और आशा मीणा शामिल हैं। ये सभी आगामी नर्सेज भर्ती में मेरिट और 10, 20, 30 बोनस अंकों के आधार पर चयन की मांग कर रहे हैं। टंकी पर चढ़ने के बाद इन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें अपनी मांगों को दोहराते हुए चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती, वे नीचे नहीं उतरेंगे।
इधर, घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और प्रदर्शनकारियों को नीचे उतारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पानी की टंकी पर चढ़ने के बाद संविदा नर्सेज नेताओं ने वहां से एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर शेयर किया है। वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे थे, लेकिन विभाग द्वारा कोई सुनवाई नहीं होने पर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम जयपुरिया अस्पताल के पास स्थित उस टंकी के पास पहुंच गई है। प्रशासन के अधिकारी तीनों नेताओं से लगातार समझाइश का प्रयास कर रहे हैं ताकि उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा जा सके और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
टंकी पर चढ़े प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग राजस्थान में आगामी नर्सेज भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। संविदा नर्सेज का कहना है कि आगामी भर्ती लिखित परीक्षा के बजाय मेरिट के आधार पर होनी चाहिए। इसके साथ ही, संविदा पर काम कर रहे कर्मियों को उनके कार्य अनुभव के आधार पर 10, 20 और 30 बोनस अंक दिए जाने चाहिए।
नर्सेज नेताओं का तर्क है कि कोरोना महामारी जैसी आपात स्थितियों में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दी हैं। इसलिए, नई भर्तियों में उनके अनुभव को प्राथमिकता देते हुए उन्हें नियमित होने का मौका दिया जाना चाहिए।
जयपुर शहर में अपनी मांगे मनवाने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ना अब एक नया ट्रेंड बन गया है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर 3 छात्र नेता भी इसी तरह पानी की टंकी पर चढ़ गए थे।
वे छात्र नेता कई घंटों तक टंकी पर डटे रहे थे। बाद में पुलिस, प्रशासन, सरकार और कांग्रेस नेताओं की तरफ से उनकी मांगों पर विचार करने का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही वे नीचे उतरे थे। उसी तर्ज पर अब संविदा नर्सेज ने भी सरकार का ध्यान खींचने के लिए यही रास्ता अपनाया है।
बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने जयपुर पुलिस और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। शहर में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को ऐसे प्रदर्शनों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। आम लोग भी अब यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पानी की टंकी पर चढ़कर मांगे मनवाने का यह सिलसिला कब थमेगा। फिलहाल मौके पर हालात नियंत्रण में हैं और पुलिस टीम नर्सेज नेताओं से लगातार वार्ता कर रही है।