
Jaipur Real Estate : जयपुर शहर में रियल एस्टेट का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। अब शहर के भीतर फ्लैट या छोटे प्लॉट लेने के बजाय लोग शहर से बाहर सस्ती जमीन पर बड़ा घर या फार्महाउस बनाना पसंद कर रहे हैं। यह बदलाव खासतौर पर उन परिवारों और निवेशकों में देखा जा रहा है, जो भीड़-भाड़, ट्रैफिक और सीमित स्पेस से दूर खुला और शांत जीवन चाहते हैं। इसी कारण जयपुर के बाहरी इलाकों में फार्महाउस और बड़े प्लॉट आधारित प्रोजेक्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और वीकेंड होम की अवधारणा ने इस ट्रेंड को गति दी है। लोग बड़े प्लॉट पर घर बनाकर उसे फार्महाउस, वीकेंड गेटवे या सेकेंड होम के रूप में उपयोग कर रहे हैं। वहीं, कुछ खरीदार इसे दीर्घकालीन निवेश के तौर पर देख रहे हैं, क्योंकि आउटर जयपुर में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है।
इसके अलावा परकोटे में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण लोग अपने पुराने मकान बेच रहे हैं। परकोटे में मकानों की अच्छी कीमत मिलने से बाहर शिफ्ट होने वाले लोग निवेश के रूप में बड़ी जमीन खरीदकर उसे वीकेंड होम के तौर पर विकसित कर रहे हैं।
आउटर जयपुर में 4500 से 14500 रुपए प्रति वर्ग गज की दर पर फार्महाउस प्लॉट उपलब्ध बताए जा रहे हैं। बीते दो वर्षों में शहर के बाहरी इलाकों में जमीन की मांग में तेजी आई है।
अजमेर रोड, कालवाड़ रोड, टोंक रोड, दिल्ली रोड और बगरू क्षेत्र इस नए रियल एस्टेट ट्रेंड के केंद्र बनकर उभरे हैं। इन इलाकों में शहर के मुकाबले जमीन के दाम कम हैं और कनेक्टिविटी भी लगातार बेहतर हो रही है। रियल एस्टेट जानकारों के अनुसार जयपुर और उसके आसपास 20 से अधिक फार्महाउस प्रोजेक्ट्स और 50 से अधिक प्लॉट स्कीम्स संचालित हैं। इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट जेडीए और रेरा से अनुमोदित बताए जा रहे हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार फार्महाउस या प्लॉट खरीदते समय भूमि उपयोग परिवर्तन, पट्टा और अनुमोदन की जांच जरूरी है। कुछ क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का जोखिम भी बना हुआ है। शहर के बाहरी इलाकों में कृषि भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनियां और फार्महाउस योजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिन पर जेडीए समय-समय पर कार्रवाई करता है। ऐसे में निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है।
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