राजधानी जयपुर में जवाहर नगर बाइपास पर एलिवेटेड रोड की जरूरत के बावजूद जेडीए ने अरण्य भवन-जगतपुरा मार्ग पर प्लान बनाया। कच्ची बस्ती और अतिक्रमण से प्रोजेक्ट अटक गया। नेता वोट बैंक बचाने में जुटे हुए हैं। ट्रैफिक जाम से हजारों लोग रोजाना परेशान हो रहे हैं।
जयपुर: जेडीए में विकास उलटी राह पर चलने की तैयारी कर रहा है या यूं कहें जयपुर विकास प्राधिकरण खास लोगों को ध्यान में रख विकास की गंगा बहा रहा है। जवाहर नगर बाइपास पर एलिवेटेड रोड की जरूरत है। जहां रोज हजारों लोग जाम से जूझ रहे हैं। बसें फंस रही हैं और लोग पीक आवर्स में घनचक्कर हो रहे हैं।
नेताओं की वोटों की फसल पर कोई आंच न आए, इसके लिए इन सभी समस्याओं को दरकिनार कर जेडीए ने दूसरी ओर (अरण्य भवन से जगतपुरा की ओर) एलिवेटड रोड का प्लान बना दिया। जेडीए अधिकारियों की मानें तो एलिवेटेड रोड बनाने के लिए जवाहर नगर बाइपास पर करीब तीन हजार अतिक्रमण हटाए जाएंगे। यह निर्णय सरकार के स्तर पर होना है।
जवाहर नगर कच्ची बस्ती करीब ढाई किमी लंबाई और करीब 600 मीटर चौड़ाई में बसी है। यहां एलिवेटेड रोड की बात तो होती है। आधी-अधूरी रिपोर्ट भी बनवाई जाती है, लेकिन धरातल पर प्रोजेक्ट को नहीं उतारा जाता। किसी भी पार्टी की सरकार रही हो और कोई भी विधायक रहा हो, किसी ने कच्ची बस्ती को शिफ्ट करने पर काम नहीं किया। उलटा मौके पर सीवर, सड़क से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित कर दीं।
मास्टरप्लान-2025 पर गौर करें तो टीला नंबर सात से रोटरी सर्कल, ट्रांसपोर्ट नगर से 200 मीटर पहले तक यह सड़क 300 फीट की प्रस्तावित है। वहीं, अरण्य भवन से टीला नंबर सात तक मास्टरप्लान में यह सड़क 200 फीट की है। इसके बाद भी जेडीए और नगर निगम ने सड़क को मूल स्वरूप में लाने की कवायद नहीं की। मौके पर सड़क 30 से 40 फीट की ही नजर आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों मास्टरप्लान की सड़क धरातल पर नहीं उतरी, जबकि वाहनों का दबाव साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है।
शाम छह बजे अरण्य भवन चौराहे से ट्रांसपोर्ट नगर के लिए निकला। शांति पथ तिराहे तक तो यातायात सामान्य रूप से चल रहा था। आगे बढ़ने के साथ ही सड़क पर ठेले दिखे। कुछ पल रुकना पड़ा। जैसे-तैसे गाड़ी बढ़ी तो हूपर में लोग कचरा डालते मिल गए। आगे बढ़े तो सड़क पर कई वाहन खड़े थे।
उससे आगे यूपी रोडवेज की दो बसें चल रही थीं। सामने से हरियाणा रोडवेज की बस आने से जाम के हालात बन गए। वाहन चालक हॉर्न बजाए जा रहे थे और कोई भी सुनने को तैयार नहीं था। ऐसे दृश्य 2.3 किमी में कई जगह मिले। यह सफर 11 मिनट में पूरा हुआ। वापस अरण्य भवन तक आए, 3.8 किमी के सफर में 18 मिनट लगे।
सवाल: एलिवेटेड रोड की जरूरत है, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए बनने नहीं दी जा रही
जवाब: शांति पथ के सर्कल से जवाहर नगर बाइपास होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक की डीपीआर बनी है। इस पर जेडीए को काम करना है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाइपास का उपयोग करने वालों को भी लाभ मिलता।
सवाल: कहा जाता है कि स्थानीय नेता कच्ची बस्ती को हटने नहीं दे रहे, अतिक्रमण की वजह से लाखों लोग परेशान हो रहे हैं?
जवाब: बस्ती को हटाना संभव नहीं है। हजारों मतदाता हैं और 60 से 70 हजार की आबादी रह रही है। वन विभाग इस जमीन को डि-नोटीफाई करे और जेडीए इन लोगों को व्यवस्थित तरीके से बसाए।
सवाल: एलिवेटेड रोड की जरूरत है, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए बनने नहीं दी जा रही?
जवाब: फॉरेस्ट लैंड होने की वजह से सड़क की पूरी चौड़ाई नहीं मिल पा रही है। यदि एलिवेटेड रोड बनेगी तो मकानों के ऊपर से जाएगी।
सवाल: कहा जाता है कि स्थानीय नेता कच्ची बस्ती को नहीं हटने दे रहे, अतिक्रमण की वजह से लाखों लोग परेशान हो रहे हैं?
जवाब: जब हमारी सरकार थी, उस समय प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए मैंने वर्ष 2017 में कच्ची बस्ती को शिफ्ट करने के लिए फाइल चलाई थी। 300 फीट चौड़ी रोड करने के लिए लिखा था। सरकार बदलने के बाद कांग्रेस ने सुध नहीं ली। अब हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।