
Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कुलिश जी ने निर्भीकता से निष्पक्ष पत्रकारिता की है। वे देश और राजस्थान को दिशा देने के लिए अडिग रहे। उसी पहल को आगे बढ़ाने का काम गुलाब कोठारी जी कर रहे हैं।
बदलते समय में पत्रकार और मीडिया को भी इसी अनुरूप काम करना होगा। पत्रकारिता जनता के मुद्दों को सामने लाती है और उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त करती है। नई पीढ़ी को कुलिश जी के विचारों को ग्रहण करना चाहिए।
कुलिश जी ने पर्यावरण व जल संरक्षण का जो बीड़ा उठाया, उसे कोठारी जी आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। मैं आज भी उनके आलेख पढ़ता हूं। वे देशभर की यात्रा करके समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं। उनकी पत्रकारिता को देखकर लगता है कि वे आज भी युवा हैं। उन्होंने कुलिश जी के भावों को देश में पहुंचाने का काम किया है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी को हमने देखा भी है, उनके आलेख पढ़े भी हैं। राजस्थान पत्रिका पूरे प्रदेश की खबर देता है। जब तक मैं पूरी पत्रिका नहीं पढ़ लेता, तब तक लगता है कि कुछ छूट गया है। देश के विकास में सभी की सहभागिता की आवश्यकता है। इस सहभागिता को दिशा कैसे दी जाए? काम को आगे कैसे बढ़ाया जाए? पत्रिका यह काम बखूबी आगे बढ़ा रहा है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के समय सभी राज्यों का माहौल अलग-अलग था। दिल्ली के नजदीक होने के कारण राजस्थान पर बाहरी प्रभाव जरूर रहा।
लेकिन मुगलों के आक्रमणों के बावजूद यहां की संस्कृति को सुरक्षित रखना इस प्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है, जहां राजतंत्र से लोकतंत्र की यात्रा हुई है। इसलिए यहां नेताओं को भी सेवा के मार्ग पर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा, चर्चा में सामने आया कि कुलिश जी ने 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति ली थी। मुझे नानाजी देशमुख का उदाहरण याद आता है, जिन्होंने राजनीति से संन्यास लेकर चित्रकूट जैसे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी तरह मैं एक महत्वपूर्ण बात कहना चाहूंगा, राजनेताओं को भी एक समय के बाद सक्रिय राजनीति से अलग होकर समाज सेवा के नए मार्ग पर चलना चाहिए।
मीडिया और जनमत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता "क्या हार में क्या जीत में…" कुलिश जी के व्यक्तित्व पर सटीक बैठती हैं। उन्होंने कहा कि गुलाब जी की लेखनी में वही मिठास है, जैसे दूध में शक्कर की, उनके शब्दों में गहराई है।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि समाचार पत्रों के सामने बड़ी चुनौती है कि पाठक नैतिकता और जमीन से कैसे जुड़ें। शिक्षा में संवेदना खत्म हो गई है। शिक्षा को मानवता का केंद्र बनाना जरूरी है। आज आत्मा जिंदा नहीं है। अर्थ और काम हावी हो रहा है।
कोठारी ने कहा कि मोबाइल जीवन का हिस्सा बन गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग मोबाइल से चिपके रहते हैं। इससे आदमी अपने आप से दूर हो रहा है। ऐसा लगता है दो पीढ़ी बाद सामाजिक समूह नहीं बचेंगे। सारे कानून भी व्यक्ति आधारित हैं। समाज पर आधारित कानून ही नहीं हैं।
उन्होंने कहा, लोगों को माटी से जोड़ने के लिए पत्रिका समूह की ओर से समय-समय पर अमृतं जलम्, हरयाळो राजस्थान, रामगढ़ बांध बचाओ जैसे अभियान संचालित किए।