
जयपुर।
राजस्थान भाजपा में इन दिनों कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। चुनाव सिर पर हैं और पार्टी नेता या तो बेबाक होकर विवादित बयानबाज़ी कर रहे हैं या फिर आपस में ही एक-दूसरे से उलझ रहे हैं। अभी कोटा में वरिष्ठ विधायकों प्रहलाद गुंजल और चंद्रकांता मेघवाल के बीच तकरार को सुर्खियां बटोरे ज़्यादा समय बीता ही नहीं है कि पार्टी के दो अन्य दिग्गजों के भी आमने-सामने होने की बात सामने आई है। ताज़ा मामला सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा और संसदीय सचिव ओमप्रकाश हुड़ला से जुड़ा है। दोनों ही मामलों में शिकायतें आलाकमान तक पहुंच गईं हैं।
भाजपा में संसदीय सचिव ओमप्रकाश हुड़ला की सार्वजनिक बयानबाजी, उनके और राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा के बीच वर्चस्व की लड़ाई आखिरकार भाजपा आलाकमान तक जा पहुंची है। किरोड़ी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र भेजकर हुड़ला पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
इससे पहले वह मुख्यमंत्री को भी मामला बता चुके हैं। दोनों नेताओं में प्रभुत्व की लड़ाई 4 साल पहले शुरू हुई थी, जो पिछले दिनों किरोड़ी के भाजपा में आने के बाद और तेज हो गई। वर्ष 2013 के चुनाव में हुड़ला भाजपा से विधायक बने थे और पार्टी ने उन्हें संसदीय सचिव बनाया था। तब किरोड़ी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़े थे। दोनों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर सडक़ पर आ गई थी।
अब किरोड़ी भाजपा में आ गए तो हुड़ला कैम्प में बैचेनी नजर आ रही है। हुड़ला की आए दिन की बयानबाजी से पार्टी नेता परेशान हैं। पिछले दिनों उनके एक बयान के बाद किरोड़ी खासे बैचेन दिखे।
मैं संघ का कार्यकर्ता, हुड़ला कांग्रेसी
किरोड़ी ने शाह को भेजे पत्र में लिखा, मेरा जीवन संघ और भाजपा के लिए काम करते हुए निकला है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं अपराधियों को संरक्षण देता हूं। जबकि सच यह है कि हुड़ला भाजपा की विचारधारा से कभी जुड़े नहीं रहे। वह तो कांग्रेसी रहे हैं। कांग्रेस के सहकारिता प्रकोष्ठ के लिए काम भी किया है। वर्ष 2013 में भाजपा ने टिकट दिया तो मोदी लहर में वह जीत गए। आज महुआ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं की स्थिति खराब है। भाजपा में कांग्रेसियों को पद दे रखे हैं।
'किरोड़ी क्या सोचते हैं, वे ही जानें। मैं इस बारे में क्या कहूं? -ओमप्रकाश हुड़ला, संसदीय सचिव