जयपुर

Patrika Expose: छोटी शिकायत से खुली JJM घोटाले की ‘विशाल’ कड़ी, फर्जी ई-मेल से 104 टेंडर पास कराने वाला अफसर बेनकाब

राजस्थान में हुए जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए केरल भेजा गया अधिकारी कथित आरोपियों के साथ होटल में ठहरा और बाद में मुन्नार भी गया। जांच में फर्जी सत्यापन, संदिग्ध लेन-देन और बोगस ई-मेल से 104 टेंडर हासिल करने का दावा सामने आया है।
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Updated: 23 Jul 2026, 10:06 AM IST
Rajasthan Jal Jeevan Mission Scam
जल जीवन मिशन घोटाले में शामिल अफसर विशाल सक्सेना (पत्रिका फोटो)

Rajasthan JJM Fraud: जयपुर: जल जीवन मिशन में करोड़ों के घोटाले की कहानी एक शिकायत से शुरू होती है। इरकॉन इंटरनेशनल के नाम पर लगाए गए अनुभव और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्रों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए एक शिकायत आई और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। इसके बाद विभाग ने दस्तावेजों की वास्तविकता जांचने के लिए अधिकारी को केरल भेजा। यही वह पड़ाव था, जहां फर्जीवाड़ा रुक सकता था। लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।

आरोपी संग ठहरे

विभाग ने शाहपुरा के तत्कालीन एक्सईएन विशाल सक्सेना को केरल के कट्टप्पना और इडुक्की भेजा। कट्टप्पना के होटल वूडलार्क के रिकॉर्ड के अनुसार, उसी अवधि में महेश मित्तल, उसके सहयोगी संजीव गुप्ता और मुकेश पाठक भी वहीं ठहरे हुए थे। जांच में शामिल रिकॉर्ड, लोकेशन इनकी एक ही अवधि में मौजूदगी दर्ज करते हैं।

रिकॉर्ड पर यह भी है कि महेश मित्तल ने अलग कमरा नहीं लिया, संजीव गुप्ता के साथ ही ठहरे। सत्यापन के दौरान जिन परियोजनाओं का हवाला दस्तावेजों में दिया गया था, उनका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला, लेकिन झूठी रिपोर्ट भेजी गई।

झूठे सत्यापन के बाद साथ मुन्नार घूमे

होटल वूडलार्क से चेकआउट करने के बाद विशाल सक्सेना, महेश मित्तल और संजीव गुप्ता मुन्नार पहुंचे। तीनों वेस्टवुड रिवरसाइड गार्डन रिसॉर्ट में ठहरे। रिसॉर्ट का भुगतान संजीव गुप्ता ने यूपीआई से किया। उसी दिन महेश मित्तल के खाते से संजीव गुप्ता के खाते में चार लाख रुपए का ट्रांसफर भी दर्ज है।

पाठक की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच में मुकेश पाठक का नाम सामने आता है। पाठक ने स्वयं को 'विजयशंकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुल्लापेरियार ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट' के रूप में प्रस्तुत किया। यात्रा से पहले उसके खाते में 50 हजार रुपए का ट्रांसफर दर्ज है। पाठक इरकॉन इंटरनेशनल के कटनी प्रोजेक्ट में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर था।

पत्रिका पड़ताल में सामने आया

गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल के नाम पर वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) प्रस्तुत किए। इन्हीं के आधार पर 237 में से 104 निविदाएं हासिल की गईं। दस्तावेजों को प्रमाणित दिखाने के लिए बोगस ई-मेल आइडी बनाई गईं और उन्हीं के माध्यम से सत्यापन संबंधी ई-मेल भेजे गए।

इस खेल के किरदार

  • विशाल सक्सेनाः तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, सत्यापन अधिकारी
  • महेश मित्तलः प्रोपराइटर, गणपति ट्यूबवेल कंपनी
  • पदमचंद जैनः प्रोपराइटर, श्याम ट्यूबवेल कंपनी
  • संजीव गुप्ताः सहयोगी, महेश मित्तल (होटल प्रवास और वित्तीय लेन-देन में शामिल)
  • मुकेश पाठकः इरकॉन के कटनी प्रोजेक्ट का निजी कर्मचारी (फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराने और केरल यात्रा में संदिग्ध भूमिका)

फोन कॉल से खुली एक और परत

जांच के दौरान सामने आई कॉल रिकॉर्डिंग में शिकायत की जानकारी आरोपियों तक पहुंचने और उसके बाद हुई बातचीत का भी उल्लेख है। रिकॉर्डिंग में सीएमओ तक शिकायत पहुंचने की चर्चा, पाइपों की गुणवत्ता को लेकर बातचीत और 'व्यवस्था' किए जाने जैसे संवाद दर्ज हैं। इन्हीं घटनाओं के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई।

सबसे बड़ा सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम तथ्य यह है कि शिकायतें समय पर मिलीं, दस्तावेजों की जांच के लिए अधिकारी को मौके पर भेजा गया और सत्यापन भी कराया गया। इसके बावजूद जिन दस्तावेजों पर सवाल उठे थे, वे आगे की निविदा प्रक्रिया का आधार बने रहे। यही वह कड़ी है, जिस पर अब पूरे मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया केंद्रित है।

Updated on:
23 Jul 2026, 10:06 AM IST
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