Rajasthan Madrasa : तीर्थंकर कल्याणक पर राजस्थान मदरसा बोर्ड की 12 मार्च से अनूठी पहल। 15 मार्च तक राज्यभर के मदरसों में भगवान ऋषभदेव का संदेश गूंजेगा। बच्चों को अहिंसा, सत्य और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
Rajasthan Madrasa : जैन धर्म के प्रवर्तक एवं प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) के जन्म-तप कल्याणक पर 12 मार्च को राजस्थान में अनूठी पहल देखने को मिलेगी। राजस्थान मदरसा बोर्ड की ओर से राज्यभर के मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों और अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में भगवान ऋषभदेव के जीवन और उपदेशों पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
गौरतलब है कि भगवान आदिनाथ ने लोक व्यवहार को चलाने तीन वर्णों की स्थापना की थी। इस संबंध में बोर्ड के सचिव चेतन चौहान ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। इस निर्णय को जैन समुदाय और अल्पसंख्यक वर्ग ने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
पूर्व प्राथमिक स्तर (तीन से छह वर्ष) : ज्ञानवर्धक खेल, भगवान ऋषभदेव के जीवन पर आधारित फिल्म/डॉक्यूमेंट्री, अमणों के प्रवचन, कहानी सुनाना और प्रार्थना।
प्राथमिक स्तर (छह से बस वर्ष) : प्रार्थना, रंगोली, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण और श्रमणों के प्रवचन।
माध्यमिक स्तर (11 से 18 वर्ष) : चित्रकला, रंगोली, मरुदेव के सोलह सपनों पर आधारित लघु फिल्म, पोस्टर निर्माण, डिजिटल प्रस्तुति और फिटनेस गतिविधियां।
चित्रकला पोस्टर प्रतियोगिताओं में भगवान ऋषभदेव के जन्म, दीक्षा, तप, ज्ञान, उपदेश और चरित्र से जुड़े प्रसंगों के साथ राष्ट्रीय एकता, स्वास्तिक प्रतीक और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
12 से 15 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रम होंगे। पहली बार यह पहल की गई है। कार्यक्रम के बाबत तैयारियां जारी है।
अभिषेक सिद्ध, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जयपुर
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद के संरक्षक जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को भगवान ऋषभदेव के आदर्श जीवन और उनके कार्यों से प्रेरणा मिलेगी।