
राजस्थान में आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों से ठीक पहले देश की राजधानी नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में अचानक बड़ी हलचल देखने को मिली है। बाड़मेर-जैसलमेर से कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल की अगुवाई में राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव व लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी से मुलाकात की। ऊपरी तौर पर हालांकि इस बैठक को एक 'शिष्टाचार मुलाकात' का नाम दिया गया है, लेकिन इसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश, समय और बैठकों की श्रृंखला ने राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचलों को तेज कर दिया है।
सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ इस अहम मुलाकात में राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, बाड़मेर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान और शेर मोहम्मद शामिल थे।
मुलाकात के बाद सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने बताया कि उन्होंने प्रियंका गांधी को बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और अतिक्रमण के नाम पर हो रही प्रशासनिक कार्रवाइयों से अवगत कराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन जिलों में मंदिर-मस्जिद जैसे धार्मिक स्थलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रिहाइशी मकानों पर की जा रही कार्रवाई से जनता में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। नेताओं ने मांग रखी कि सदियों से भाईचारे और गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल रहे थार क्षेत्र के सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली साजिशों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
प्रियंका गांधी से मुलाकात के तुरंत बाद बाड़मेर के इन प्रमुख नेताओं का दल AICC महासचिव, छत्तीसगढ़ प्रभारी और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से मिलने पहुंचा।
दिल्ली में सचिन पायलट के साथ हुई इस बैठक को लेकर भी राजनीतिक कयासबाजियों का दौर शुरू हो गया है। इस मुलाकात में भी पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद, गफूर अहमद, फतेह खान और शेर मोहम्मद मौजूद रहे।
नेताओं ने सचिन पायलट के साथ प्रदेश के समसामयिक राजनीतिक हालात, आगामी चुनावी रणनीति और सीमांत इलाकों में उपजे तनाव जैसे जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
दिल्ली दौरे का सबसे चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम तब देखने को मिला जब सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर राजस्थान कांग्रेस की एक रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस का लगभग पूरा शीर्ष नेतृत्व एक ही छत के नीचे नजर आया।
इस उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान कांग्रेस प्रभारी व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मौजूद रहे।
इनके अलावा राज्यसभा सांसद व सचेतक नीरज डांगी, भरतपुर सांसद संजना जाटव, झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र ओला, दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा, टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरीश चंद्र मीणा, चूरू सांसद राहुल कस्वां, करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सांसद कुलदीप इंदोरा भी शामिल रहे।
दिल्ली में बैक-टू-बैक हुई इन तीन बड़ी बैठकों के केंद्र में राजस्थान के आगामी पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनाव रहे। लोकसभा चुनावों में राजस्थान में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन के बाद अब पार्टी प्रदेश में स्थानीय स्तर पर सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने की बड़ी रणनीति तैयार कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में प्रियंका गांधी से मुलाकात, पायलट से संवाद और फिर रंधावा-डोटासरा-जूली की मौजूदगी में सांसदों का यह जुटान महज इत्तेफाक नहीं है। यह राजस्थान कांग्रेस द्वारा संगठन को पूरी तरह एकजुट रखने और आने वाले चुनावों में भाजपा के खिलाफ एक आक्रामक और संगठित मोर्चा खोलने की पूर्व-तैयारी का साफ संकेत है।