जयपुर

Rajasthan Rail Connectivity : बुलेट ट्रेन के दौर में राजस्थान के 8 जिला मुख्यालय रेल सेवा को क्यों तरसे, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Rajasthan Rail Connectivity : रेलवे बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के 8 जिला मुख्यालय रेल कनेक्टिविटी से अभी तक वंचित हैं। जानें इन जिलों के नाम। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।

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ग्राफिक्स फोटो पत्रिका

Rajasthan Rail Connectivity : देश में हर रोज औसत 8.57 किलोमीटर रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा है। रेलवे बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के 8 जिला मुख्यालय रेल कनेक्टिविटी से अभी तक वंचित हैं। बांसवाड़ा से लेकर नवाबों का शहर टोंक और करौली जैसे जिला मुख्यालय के लोग आज भी रेल के इंजन की पहली सीटी सुनने का इंतजार कर रहे हैं। टोंक, सलूम्बर, सिरोही और करौली में होकर रेल लाइनें तो गुजरती हैं, लेकिन जिला मुख्यालय तक ट्रेन नहीं पहुंची।

टोंक जिला मुख्यालय के लिए रेल की मांग दशकों से सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है। नए जिले सलूंबर और कोटपूतली-बहरोड़ के सामने भी सबसे बड़ी बाधा रेल मार्ग की है, जिससे वहां की औद्योगिक और पर्यटन संभावनाओं को पंख नहीं लग पा रहे हैं।

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जयपुर को रिंग रेलवे की सौगात

जयपुर को रिंग रेलवे से जोड़ने के लिए रेलवे 70 किमी रूट पर फाइनल लोकेशन और इकोनॉमिक सर्वे कर रहा है। ऐसे ही, मंदसौर-प्रतापगढ़-बांसवाड़ा (120 किमी), अजमेर-टोंक-चाकसू-बस्सी (236 किमी), लुहारू-पिलानी (24 किमी), खाटूश्यामजी-सालासर-सुजानगढ़ (45 किमी), फलोदी-नागौर (148 किमी), कोटपूतली-डाबला (38 किमी) परियोजना का भी सर्वे चल रहा है। खातीपुरा, भट्टों की गली, लालगढ़, उमरा और भगत की कोठी में कोचिंग डिपो प्रस्तावित हैं। वहीं धानक्या, हिरनोदा, माणकलाव, बिरधवाल, नवलगढ़ और भावी में फ्रेट टर्मिनल प्रस्तावित हैं।

डीपीआर तैयार, शुरुआत का इंतजार

सरमथुरा-गंगापुर सिटी (77 किमी), देवगढ़-बर (102 किमी), रास-बिलाड़ा वाया जैतारण (62 किमी), अनूपगढ़-बीकानेर (187 किमी) नई रेल लाइन के लिए डीपीआर बन गई है। इन 442 किमी लाइन पर 7859 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनके अलावा फुलेरा-नारनौल (164 किमी), लूणी-केरला (26) व केरला-मारवाड़ जंक्शन (46 किमी) रेललाइन के दोहरीकरण की डीपीआर बन गई है।
रेवाड़ी-सादलपुर (142 किमी), बठिंडा-बीकानेर (324), रींगस सीकर-लुहारू (172 किमी), उमरा-देबारी (25 किमी), मेड़ता रोड-बीकानेर (172 किमी), लालगढ़-जैसलमेर (314 किमी), जयपुर-चौमूं सामोद (27 किमी), राइका बाग-मारवाड़ मथानिया (31 किमी) दोहरीकरण के लिए लोकेशन सर्वे हो रहा है।

करौली को पांच दशक का इंतजार

करौली को रेल से जोड़ने की मांग बीते पांच दशक पहले उठी थी, जब वह जिला भी नहीं था। लम्बे इंतजार के बाद करौली जिला मुख्यालय को रेल से जोड़ने के लिए वर्ष 2010-11 में धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना स्वीकृत हुई थी। इसके तहत धौलपुर से सरमथुरा तक नैरोगेज से ब्रॉडगेज परिवर्तन और सरमथुरा से करौली होते हुए गंगापुरसिटी तक नई रेल लाइन शामिल है। लेकिन शुरू से ही यह परियोजना लचर गति से चल रही है।

वर्ष 2013 में परियोजना का सरमथुरा में शिलान्यास किया गया, लेकिन अब तक यह रेल परियोजना गति नहीं पकड़ पाई है। वर्तमान में सरमथुरा से धौलपुर तक ब्रॉडगेज का कार्य प्रगति पर है, जबकि द्वितीय फेज के लिए सरमथुरा से करौली के बीच नई रेलवे लाइन की विस्तृत कार्य योजना रिपोर्ट को अभी स्वीकृति का इंतजार है।

दशकों से हो रही मांग

कोटपूतली क्षेत्र के लोग 1962 से ही कोटपूतली को रेल से जोडऩे की मांग कर रहे हैं। कोटपूतली से जयपुर दिल्ली राजमार्ग निकालने के बाद इस मांग ने जोर पकड़ा था। पूर्व विधायक मुक्तिलाल मोदी सहित अन्य विधायकों ने रेल की मांग की थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

इन परियोजनाओं को चाहिए स्पीड

नई लाइन - दूरी - लागत
तारंगा हिल-आबू रोड - 117 - 2,798
नीमच-बड़ी सादड़ी- 48 - 495
रतलाम-डूंगरपुर- 192 - 6,200
पुष्कर-मेड़ता- 51 - 800
रींगस-खाटूश्यामजी - 17 - 254
रास-मेड़ता-बायपास- 56 - 947
(दूरी किलोमीटर में, राशि करोड़ रुपए में)

दोहरीकरण से मिलेगी ‘डबल रफ्तार’

जयपुर-सवाई माधोपुर (131 किमी.), चूरू-रतनगढ़ (43 किमी.), चूरू-सादुलपुर (58 किमी.), अजमेर-चंदेरिया (178 किमी.), लूणी-समदड़ी-भीलड़ी (272 किमी.) व देवगढ़-नाथद्वारा रेलमार्ग पर दोहरीकरण का काम चल रहा है।

तीन बार संसद में मुद्दा उठाया, प्रयास जारी हैं

सिरोही जिला मुख्यालय को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए 3 बार लोकसभा में मुद्दा उठाया। रेलमंत्री, प्रधानमत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की है। इस पर रेलवे बोर्ड ने मारवाड़-बागरा-सिरोही-स्वरूपगंज नई रेल लाइन के सर्वे की स्वीकृति दी है।
लुंबाराम चौधरी, सांसद, जालोर-सिरोही

निकटतम क्षेत्र में रेलवे की सुविधा है

आजादी के बाद से पहली बार मेरे कार्यकाल में प्रतापगढ़ जिले को रेल लाइन से जोड़ने के लिए सर्वे कार्य शुरू करवाया गया है। निकटतम क्षेत्र में रेलवे सेवा की सुविधा भी मिल रही है।
सीपी जोशी, सांसद, प्रतापगढ़-चित्तौडगढ़

महिमा कुमारी मेवाड़, सांसद, राजसमंद। फोटो पत्रिका

भविष्य में राजसमंद को मिलेगी रेल

देवगढ़ से बर के लिए सर्वे हो गया है। राजसमंद के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। रेल लाइन का काम पूरा होते ही राजसमंद के लिए नई ट्रेनों को लाने का प्रयास करेंगे।
महिमा कुमारी मेवाड़, सांसद, राजसमंद

प्रमुख कस्बों को रेल से जोड़ने का प्रयास

जयपुर-दिल्ली को वाया कोटपूतली, शाहपुरा, मनोहरपुर सहित अन्य प्रमुख शहर व कस्बों को जोड़ते हुए रेल मार्ग को लेकर प्रयासरत हैं। केन्द्र सरकार लगातार रेलवे सेवाओं का विस्तार कर रही है।
राव राजेंद्र सिंह, सांसद, जयपुर ग्रामीण

इस मुद्दे पर पीएम से भी मिल चुके हैं

रतलाम-डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेलवे प्रोजेक्ट को जल्द पूर्ण कराने को लेकर प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री व रेल मंत्री से भी मुलाकात की है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने को लेकर आश्वस्त किया है।
राजकुमार रोत, सांसद, बांसवाड़ा-डूंगरपुर

डॉ. मन्नालाल रावत, सांसद, उदयपुर। फोटो पत्रिका

मुद्दे को रेल मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा

सलूम्बर जिला रेलवे लाइन से जुड़ा है, लेकिन जिला मुख्यालय अभी तक नहीं जुड़ा है। भविष्य की संभावनाओं और मांग को ध्यान में रखकर इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. मन्नालाल रावत, सांसद, उदयपुर

जल्द रेल मंत्री से मिलकर मांग रखेंगे

बजट सत्र के दौरान करौली रेलवे लाइन मामले को लोकसभा में रखेंगे। सरमथुरा-करौली-गंगापुरसिटी की डीपीआर पहले जयपुर जोन में थी, अब प्रयागराज को दे दी है। रेलमंत्री को इस मांग से अवगत कराएंगे।
भजनलाल जाटव, सांसद, करौली-धौलपुर

योजना थी पर सरकार ने नहीं दिया ध्यान

जिला मुख्यालय टोंक में रेल की मांग काफी पुरानी है। कांग्रेस सरकार के समय इसकी स्वीकृति जारी हुई। लेकिन भाजपा सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मामले से रेल मंत्री को भी अवगत कराया है।
हरीशचन्द्र मीना, सांसद टोंक-सवाईमाधोपुर

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Updated on:
29 Jan 2026 11:54 am
Published on:
29 Jan 2026 11:51 am
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