Rajasthan News: राजस्थान सरकार सोलर और ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को लेकर नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। नए प्रस्तावों के तहत जमीन आवंटन, परियोजना विकास और ग्रीन कॉरिडोर से जुड़े प्रावधानों में अहम संशोधन किए जा सकते हैं।
Solar Projects Update: राजस्थान सरकार राज्य में ग्रीन एनर्जी और सोलर प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन से जुड़े नियमों में संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब भविष्य में सोलर और अन्य अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवंटित होने वाली जमीन का 10 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित करना अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राज्य में बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करना और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित करना है।
सूत्रों के अनुसार इन प्रस्तावित संशोधनों से जुड़ा एजेंडा जल्द ही राज्य कैबिनेट की बैठक में रखा जा सकता है। हाल ही में ऊर्जा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच इस विषय पर विस्तृत चर्चा भी हुई है। माना जा रहा है कि सरकार ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी और समयबद्ध विकास सुनिश्चित करना चाहती है।
सरकार सोलर पार्क डवलपर्स की भूमिका को भी स्पष्ट करने जा रही है। नए नियमों के तहत जमीन आवंटन की प्रक्रिया, परियोजना विकास की समय सीमा और डेवलपर्स की जिम्मेदारियों को तय किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार जमीन आवंटन के बाद निर्धारित समय सीमा में सोलर पार्क विकसित करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में परियोजना पूरी नहीं होती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सरकार छह माह तक अतिरिक्त समय देने का प्रावधान भी रख सकती है।
सरकार का मानना है कि भविष्य में अक्षय ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ेगा, ऐसे में बिजली ट्रांसमिशन के लिए मजबूत ग्रीन कॉरिडोर की जरूरत होगी। इसी कारण नई नीति में 10 प्रतिशत जमीन ग्रीन कॉरिडोर के लिए रिजर्व रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे सोलर ऊर्जा परियोजनाओं से बनने वाली बिजली को अन्य राज्यों और क्षेत्रों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
प्रस्तावित संशोधनों में एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब पावर प्रोड्यूसर अपनी लीज पर मिली जमीन का अधिकार अपनी ही सब्सिडियरी कंपनी को ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार अक्षय ऊर्जा निगम की सिफारिश पर अनुमति दे सकेगी। यह प्रावधान कंपनी एक्ट के तहत परिभाषित सब्सिडियरी कंपनियों पर लागू होगा। इससे बड़े निवेशकों और डेवलपर्स को परियोजनाओं की फाइनेंसिंग, निवेश जुटाने और कॉर्पोरेट री-स्ट्रक्चरिंग में काफी सुविधा मिलने की संभावना है।