जयपुर

राजस्थान में निकाय-पंचायत चुनाव कब होंगे ? हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, जानें कोर्ट ने क्या कहा?

राजस्थान में होने वाले निकाय-पंचायत चुनावों को लेकर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जानें सरकार की तरफ से कोर्ट में क्या दलील दी गई? वहीं इन दलीलों पर कोर्ट ने क्या कहा?
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May 11, 2026
Chhattisgarh Youth Congress
6 पदों पर एक साथ मतदान: Chhattisgarh Youth Congress (फोटो सोर्स: पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद चुनाव लगातार टाले जा रहे हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

दरअसल, राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर पंचायत और निकाय चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की थी। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि निकाय चुनावों में वार्डों के आंतरिक परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसलों के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई है। साथ ही ओबीसी आरक्षण को लेकर आयोग की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिलने से चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया।

ओबीसी आयोग का पचड़ा

इस पर अदालत ने सरकार से तीखे सवाल किए। बेंच ने पूछा कि यदि आदेश मुख्य रूप से निकाय चुनावों को लेकर था तो पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए। अदालत ने यह भी कहा कि ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी कोर्ट के सामने नहीं रखी गई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आयोग की स्थिति स्पष्ट होती तो उसे भी निर्देश दिए जा सकते थे।

भीषण गर्मी और बारिश का हवाला

सुनवाई के दौरान सरकार ने मौसम को भी चुनाव टालने का कारण बताया। महाधिवक्ता ने कहा कि जून में राजस्थान में भीषण गर्मी और हीटवेव रहती है, जबकि जुलाई में बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। ऐसे में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि राजस्थान के लोग गर्मी से निपटना जानते हैं। वहीं बारिश के तर्क पर अदालत ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, 'राजस्थान में बरसात?'

डेढ़ साल से चुनाव टालने का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाया। एडवोकेट पुनीत सिंघवी ने कहा कि सरकार की चुनाव कराने की मंशा ही नहीं है और प्रदेश में संवैधानिक संकट की स्थिति बन चुकी है। पंचायतों और निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासक और अधिकारी काम संभाल रहे हैं। वहीं एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि प्रदेश की हजारों पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पिछले डेढ़ साल से चुनाव टाले जा रहे हैं।

15 अप्रैल तक कराने थे चुनाव

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव समय पर कराने की बात कही थी, लेकिन अब सरकार और राज्य चुनाव आयोग दोनों ने अतिरिक्त समय मांगा है।

18 मई को होगी अगली सुनवाई

इसी मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की गई है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी। सरकार ने अपने आवेदन में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, ईवीएम, स्टाफ और अन्य संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए चुनाव आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।

'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का भी उठा मुद्दा

साथ ही यह भी कहा गया कि आगामी महीनों में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, ऐसे में बाद में चुनाव कराने से 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।

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