
पत्रिका गेट पर बुधवार रात को वुमन मिडनाइट वॉक के तहत जुटीं महिलाओं ने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर महिला आजादी के नारे लगाए। पत्रिका गेट से शुरू होकर वॉक जवाहर सर्किल के चक्कर लगाकर खत्म हुई।
जयपुर. रात करीब साढ़े आठ बजे पत्रिका गेट पर महिलाओं और लड़कियों का जमावड़ा शुरू हुआ। हाथों में तख्तियां थीं और जुबां पर सवाल- 'रात किसकी? शहर किसका? आजादी किसकी ?' कुछ ही देर में सड़क नारों से गूंज उठी-'हम औरतें अपने आप की, ना किसी के बाप की', 'हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, पितृसत्ता की सोच है छोटी' और 'बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो।' वॉक आगे बढ़ी तो नारे भी तेज होते गए- 'शर्म नहीं है मर्दो में, औरत क्यों है पर्दो में?' और 'नहीं डरेंगे डर के, मर्द को रखो घर में।'
ठहाकों और चुटीले नारों के बीच सवाल गंभीर था- महिलाओं को रात में अपने ही शहर की सड़कों पर निकलने से रोका क्यों जाए? जयपुर में पहली बार द सिविक वॉयस और जयपुर कॉमन मूवमेंट की ओर से वुमन मिडनाइट वॉक आयोजित की गई। पत्रिका गेट से शुरू हुई वॉक जवाहर सर्किल का चक्कर लगाकर खत्म हुई। इसमें 900 से एक हजार महिलाएं और लड़कियां शामिल हुईं। कुछ पुरुषों ने भी महिलाओं की सुरक्षा और आजादी के समर्थन में हिस्सा लिया। आयोजक मुकुल मिश्रा ने कहा कि महिलाएं कब तक रात में अपने ही शहर में कैद रहेंगी? सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की मौजूदगी सामान्य होनी चाहिए। वॉक के दौरान कहीं गीत गूंजे तो कहीं कविता सुनाई गई। महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। हंसी-ठिठोली के बीच सुरक्षा, बराबरी और सार्वजनिक जगहों पर स्वतंत्र आवाजाही का मुद्दा प्रमुख रहा। महिलाएं अपनी मां, बहन, पिता, भाई और दोस्तों के साथ शामिल हुईं।
वुमन मिडनाइट वॉक की शुरुआत 2016 में दिल्ली में मल्लिका तनेजा ने की थी। निर्भया आंदोलन के बाद शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की रात में सार्वजनिक जगहों पर मौजूदगी और स्वतंत्र आवाजाही को लेकर जागरूकता पैदा करना रहा है। पहल का संदेश है कि महिलाओं को रात से डराने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को उनके लिए सुरक्षित बनाया जाए।
200 फीट बायपास से 13 साल की बेटी परी के साथ पहुंचीं अनुजा ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी बेटी सुरक्षित महसूस करे और डर के बजाय आजादी के साथ जीवन जिए। परी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की खबरें देखकर कई बार बाहर निकलने में डर लगता है। सांगानेर से आलमीन अपनी 9 साल की बहन अफिसा के साथ पहुंचीं। उन्होंने कहा कि रात में सुरक्षित होकर बाहर निकलना सिर्फ पुरुषों का अधिकार नहीं होना चाहिए।
वॉक में शामिल पहल वर्मा और अनुराधा तिवारी ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए बच्चों को शुरू से बराबरी और सम्मान की शिक्षा देनी होगी। महिलाओं ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर लड़कियों के कपड़ों और बाहर निकलने के समय पर पाबंदी लगाने के बजाय लड़कों और पुरुषों को सम्मान, सहमति और बराबरी की समझ देना जरूरी है। वैशाली नगर से आए संजय ने कहा कि महिलाओं की आजादी और सुरक्षा का मुद्दा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। समाज की सोच में बदलाव के लिए पुरुषों की भागीदारी भी जरूरी है।
Updated on:
01 Oct 2026 11:00 am
Published on:
01 Oct 2026 11:00 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
