राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया। छोटे उल्लंघनों में जेल की सजा हटाकर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने कहा, इससे ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ेगा।
जयपुर: विधानसभा में गुरुवार को करीब ढाई घंटे की चर्चा के बाद ईज ऑफ लिविंग व ईज ऑफ डूईंग बिजनस को बढ़ाने देने वाला राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस विधेयक में जो प्रावधान हैं, वे न्यायालयों का क्षेत्राधिकार कम करके अधिकारियों के लिए भ्रष्टाचार का रास्ता खोलने वाले हैं।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह न तो न्यायिक क्षेत्राधिकार को और न ही कार्यपालिका के अधिकारों को कम करने या बढ़ाने के लिए है। न ही न्यायपालिका के अधिकार छीनता है। यह प्रशासनिक सुधार के साथ शासन में नागरिकों का विश्वास बढ़ाने वाला कदम है।
पटेल ने कहा कि पूर्व के 11 अधिनियम छोटे उल्लंघन या तकनीकी चूक के लिए भी कारावास जैसे प्रावधान करते हैं। यह विधेयक गंभीर अपराध करने वालों को राहत देने के लिए नहीं, बल्कि बार-बार अपराध करने वालों को कठोर दंड देने के लिए है।
राजस्थान भंडार गृह अधिनियम के तहत बिना लाईसेंस भंडारण किए जाने पर पहले एक साल तक का कारावास और 1 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अब कारावास हटाकर जुर्माना राशि 50 हजार रुपए तक बढ़ाई है।
साथ ही घरेलू पेयजल कनेक्शन के गैर घरेलू उपयोग पर पहले एक वर्ष तक सजा का प्रावधान था, अब सजा के तौर पर प्रतिदिन 200 से 1 हजार रुपए प्रतिदिन तक जुर्माने का प्रावधान किया है।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि राज्य सरकार खेजड़ी संरक्षण के लिए ट्री एक्ट लेकर लाएगी। इस पर विधि विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं।
प्रश्नकाल के दौरान एक क्षण के लिए हास्यास्पद स्थिति बन गई, जब एक ही सवाल के जवाब के लिए दो मंत्री खड़े हो गए। दरअसल, भाजपा के हरि सिंह रावत ने प्रश्न पूछा, जिसका जवाब विधि मंत्री जोगाराम पटेल दे रहे थे।
इसी दौरान पूरक प्रश्न पर जवाब देने के लिए जैसे ही मंत्री पटेल खड़े हुए, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत भी कंफ्यूजन में अपनी सीट से खड़े हो गए। पास बैठे अन्य मंत्रियों ने तुरंत उन्हें संकेत देकर बताया कि प्रश्न का जवाब विधि मंत्री दे रहे हैं।