
Rajasthan Panchayat Nikay Elections : राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण के निर्धारण को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन हुए 13 माह से अधिक हो गए हैं। पिछले पांच माह से आयोग व राज्य सरकार के बीच चिट्ठियों का खेल चल रहा है। आरक्षण का काम अटका हुआ है। इस बीच सरकार अब तक आयोग पर करीब 40 लाख रुपए खर्च कर चुकी, जिसमें से करीब 25 लाख सेवानिवृत्ति बाद लगे अध्यक्ष-सचिव के खाते में गए। तीन माह से बजट जारी नहीं आने से आयोग में उनके भी वेतन-मानदेय अटके हुए हैं।
आयोग में अध्यक्ष व चार सदस्यों के साथ ही सात अधिकारी-कर्मचारी हैं। इनमें से अध्यक्ष और सचिव सेवानिवृत्ति बाद पे-माइनस पेंशन पर लगे हुए हैं, जबकि सदस्य 45 हजार रुपए फिक्स मानदेय पर हैं। अन्य कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं, जबकि सचिव राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।
आयोग को वाहनों के लिए 12 लाख रुपए का बजट दिया गया। उसके बाद ओबीसी आरक्षण के आधार तय करने के लिए आयोग के अध्यक्ष और सदस्य संवाद सहित अन्य कार्यों के लिए नवम्बर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दौरे पर गए, लेकिन अब वाहनों के बिल अटक गए हैं।
मंत्रिमंडलीय समिति ने बिलों को हरी झंडी नहीं दी है। अब सर्वे को लेकर आयोग सदस्य फिर दौरे पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पुराने बिलों का भुगतान नहीं मिलने से वाहन मिलने में अड़चन आ सकती है और उसका सीधा असर सर्वे कार्य पर पडे़गा। उधर, आयोग स्टेशनरी के लिए स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग पर निर्भर है।
पहले आयोग ने पिछले साल ओबीसी के लिए सर्वे कराने की तैयारी की, लेकिन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के कारण कार्य अटक गया। इस पर संवाद के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए आयोग ने राजस्थान सरकार से ओबीसी के आकड़े मांगे, जिस पर सरकार ने जनाधार के आंकड़े उपलब्ध करा दिए।
इन आंकड़ों में कुछ पंचायतों की जानकारी ही नहीं मिली, तो आयोग ने सरकार से इन पंचायतों की डिटेल मांगी। सरकार के हाथ खड़े करने पर अब आयोग फिर से सर्वे की तैयारी कर रहा है।