जयपुर

राजस्थान परिवहन विभाग में बड़ा घोटाला: 450 अफसर-कर्मिकों पर दर्ज होगी FIR, रिकॉर्ड जलाया गया, सरकार को 600 करोड़ की चपत

जयपुर से शुरू हुए थ्री डिजिट वीआईपी नंबर घोटाले में प्रदेशभर में 10 हजार नंबरों की हेराफेरी सामने आई। 450 से अधिक अफसर और कर्मिक चिन्हित हुए। सरकार को 500-600 करोड़ की राजस्व हानि हुई।

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Nov 28, 2025
थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों में फर्जीवाड़ा (फोटो- पत्रिका)

जयपुर: परिवहन विभाग में थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े में लगातार परतें खुल रही हैं। विभाग में यह अभी का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। विभाग ने करीब 450 से अधिक अफसर और कार्मिकों को चिन्हित कर लिया है।

इन सब के खिलाफ एफआईआर कराने तक के निर्देश दिए जा चुके हैं। निर्देशों के बाद राज्य से सभी आरटीओ- डीटीओ कार्यालयों में फर्जीवाड़े में लिप्त कार्मिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। जयपुर में सबसे अधिक अफसरों और कार्मिकों के खिलाफ 32 मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।

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आलम यह है कि परिवहन विभाग में हुए इस फर्जीवाड़े में हर तीसरा अफसर-कार्मिक दोषी पाया गया है। इनमें से किसी ने पैसों के लालच में तो किसी ने उच्च स्तर पर दवाब के बाद नंबरों में फर्जीवाड़ा किया।

विभाग की ओर से कानूनी कार्रवाई के निर्देश देने के बाद एक ओर जहां पुलिस इस प्रकरण को लेकर हरकत में आ गई है। वहीं, ईडी और एसीबी भी मामले में सक्रिय हो गई है। ईडी ने परिवहन विभाग से मामले में जानकारी भी मांगी है।

500 करोड़ की लगा दी सरकार को चपत

परिवहन विभाग की ओर से फर्जीवाड़े के मामले में गठित जांच कमेटी ने प्रदेश में 10 हजार वीआईपी नंबरों के हेरफेर की आशंका जताई है। कमेटी ने इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपए की राजस्व हानि का होना भी पाया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आरटीओ कार्यालयों में वीआईपी नंबरों को नियम विरुद्ध पंजीयन कर बेच दिया गया। आरसी और आधार सहित अन्य फर्जी दस्तावेजों से वाहनों को बेचा गया।

जयपुर से हुआ खुलासा, पत्रिका ने उजागर किया

दरअसल, जयपुर आरटीओ प्रथम में बाबू और सूचना सहायक के फर्जीवाड़े की पोल खुली थी। इसके बाद जयपुर आरटीओ प्रथम राजेंद्र शेखावत ने मामले में जांच कराई तो 70 से अधिक थ्री डिजिट के नंबरों को फर्जी तरीके से दूसरे वाहनों के नाम करने का मामला समाने आया।

इस पूरे प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने एक्सपोज किया और बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इसके बाद विभाग ने सभी आरटीओ कार्यालयों की जांच कराई।

एजेंटों के लालच में आए तो कोई दबाव में आया

विभाग की ओर से सीरीज बंद करने और बिना वाहन मालिक की जानकारी के बाद भी अफसरों और बाबुओं ने दलालों के साथ मिलकर साल 1989 से पहले थ्री डिजिट के नंबरों को फर्जी तरीके से दूसरों के नाम कर दिया।

इतना ही नहीं फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए आरटीओ कार्यालयों से रिकॉर्ड भी गायब करा दिया तो किसी ऑफिस में रिकॉर्ड ही जला दिया। इस काम में आरटीओे के एजेंट और बाबुओं की मिलीभगत अधिक रही। कुछ वीआईपी नंबरों को सांसद, विधायक, अफसरों और उद्योगपतियों ने भी खरीदा है। उच्च स्तर पर दबाव के बाद बाबुओं ने ऐसे नंबर जारी कर दिए।

प्रकरण में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सभी आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों को दोषियों पर एफआईआर कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
-ओपी बुनकर, अपर आयुक्त परिवहन विभाग

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Published on:
28 Nov 2025 09:13 am
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