जयपुर

Rajasthan: यूसीसी बिल के लिए सरकार का प्लान, नवंबर में फिर बुलाया जा सकता है विधानसभा सत्र

राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक नवम्बर में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए 20 अगस्त को शुरू होने वाले विधानसभा के छठवें सत्र में ब्रेक लिया जाएगा। इस बीच विधानसभा सत्र के लिए तैयारियां तेज हो गई, वहीं अधिकारियों को सत्र के दौरान विधायकों की सदस्यता वाली कमेटियों की बैठक नहीं बुलाने, विधानसभा के लिए कम संख्या में पास बनवाने, दीर्घा में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की हिदायत दी गई है।
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Aug 05, 2026
Rajasthan assembly
फाइल फोटो- राजस्थान विधानसभा

जयपुर। राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक नवम्बर में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए 20 अगस्त को शुरू होने वाले विधानसभा के छठवें सत्र में ब्रेक लिया जाएगा। इस बीच विधानसभा सत्र के लिए तैयारियां तेज हो गई, वहीं अधिकारियों को सत्र के दौरान विधायकों की सदस्यता वाली कमेटियों की बैठक नहीं बुलाने, विधानसभा के लिए कम संख्या में पास बनवाने, दीर्घा में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की हिदायत दी गई है।

प्रदेश में इन दिनों समान नागरिक संहिता विधेयक के लिए आम नागरिकों सहित विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इन सुझावों पर विचार कर उच्च स्तरीय कमेटी यूसीसी विधेयक के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देगी। कमेटी के सदस्य संभागवार विभिन्न वर्गों से चर्चा कर चुके हैं, जिनमें मुस्लिम वर्ग खासकर काजियों के संगठन के प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिए। इसमें यह भी शिकायत सामने आई कि दूसरे राज्यों के कुछ मौलवी यहां आकर निकाह करवा जाते हैं, जबकि काजी ही निकाह करवाने के लिए अधिकृत हैं। इन बैठकों में एक मुस्लिम स्कॉलर ने यह भी कहा कि यूसीसी ने मुस्लिम महिलाओं के हित भी सुरक्षित होंगे।

अधिकारियों को दी हिदायत

संसदीय कार्य विभाग ने राजस्थान विधानसभा सत्र को लेकर कई परिपत्र जारी किए हैं, जिनमें अधिकारियों को कई तरह की हिदायतें दी गई हैं। शून्यकाल के दौरान स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव व विशेष उल्लेख प्रस्तावों के माध्यम से उठने वाले मुद्दों पर मंत्रियों की ओर से जवाब दिया जाता है, जिसमें सहयोग के लिए सभी विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव स्तर के अधिकारी विधानसभा की अधिकारी दीर्घा में मौजूद रहें। विधानसभा अध्यक्ष इस बारे में पूर्व में व्यवस्था देते रहे हैं। स्थगन प्रस्ताव पर 24 घंटे में, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर तीन दिन में और विशेष उल्लेख प्रस्ताव पर सात दिन में तथ्यात्मक उत्तर डिजिटल माध्यम से भेज दिया जाए।

विधानसभा की दीर्घा में आते-जाते समय अधिकारी सदन की गरिमा व सम्मान का ध्यान रखें। अध्यक्ष जब खडे़ होकर व्यवस्था दे रहे हों तो दीर्घा से अधिकारी जाएं नहीं और न ही दीर्घा में प्रवेश करें। दीर्घा में मोबाइल ले जाने पर पाबंदी है, जिसकी भी पालना करने को कहा गया है। विधानसभा में शासन उप सचिव या उससे ऊपर के अधिकारी को ही अस्थायी प्रवेश पत्र जारी करने का प्रावधान है।

सभी विभागों के मुखियाओं को हिदायत दी गई है कि कम से कम संख्या में प्रवेश पत्र जारी करवाए जाएं, ताकि दीर्घा भरी होने के कारण अधिकारियों को प्रवेश के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी पडे। सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विशिष्ठ सचिवों व विभागाध्यक्ष सत्र आरंभ होने से पहले अपने वाहनों का पास जारी करवाएं। जिन नियम, उप नियम व उप विधियों को सदन में पेश कर उनके अनुमोदन की आवश्यकता है, उन्हें विधानसभा को भेज दिया जाए।

तो विशेषाधिकार हनन माना जाएगा

विधानसभा सत्र आरंभ होने के दो दिन पहले और सत्र समाप्ति के दो दिन बाद तक उन समितियों की बैठक नहीं बुलाई जाए, जिनमें विधायकों को सदस्य के रूप में मनोनीत किया हुआ है। यदि संबंधित विधानसभा सदस्य की सहमति बिना समिति की बैठक बुलाई जाएगी तो उसे विशेषाधिकार हनन माना जाएगा और दोषी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Updated on:
05 Aug 2026 06:57 am
Published on:
05 Aug 2026 06:57 am