
जयपुर . राजस्थान हाईकोर्ट में 13 अगस्त को होने वाली सुनवाई से कोर्ट की नाराजगी से बचने के लिए प्रशासन ने सोमवार को रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की शुरुआत तो कर दी, लेकिन फौरी कार्रवाई ने सवाल खड़े कर दिए। प्रशासन का पीला पंजा खेतों की मेड़, फसल और छोटी दीवारों तक चला, जबकि सूची में शामिल पक्के निर्माण और रसूखदारों के अतिक्रमण कार्रवाई से बाहर रहे। प्रशासन ने पहले दिन करीब 20 बीघा सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा किया। जयपुर विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग की अलग-अलग टीमों ने कई इलाकों में कार्रवाई की। नाले को मिट्टी से पाटकर खेती करने, फेंसिंग और छोटी दीवारों जैसे अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए।
तहसील जमवारामगढ़ थाना रायसर में ग्राम चारणवास उर्फ काली पहाड़ी में करीब दो बीघा, ग्राम जयचन्दपुरा में आठ बीघा, परगना व तहसील आमेर के ग्राम बगवाड़ा, भीमपुरा में करीब चार बीघा और तहसील आमेर ग्राम सिरोही में 02 स्थानों पर और दिल्ली रोड पर ग्राम जुगलपुरा, तहसील आमेर में करीब छह बीघा भूमि पर अतिक्रमण हटाए गए। यहां अतिक्रमणियों ने बहाव क्षेत्र में अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। कार्रवाई के दौरान बहाव क्षेत्र को मुक्त किया गया।
रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई। प्रशासन और जेडीए ने दिनभर कई जगह जेसीबी चलाई, लेकिन कार्रवाई का निशाना मुख्य रूप से फसल, छोटी दीवार और अस्थायी अतिक्रमण ही रहे। दूसरी ओर बहाव रोकने वाले पक्के निर्माण, फार्म हाउस और रिसॉर्ट्स को छूने तक की जहमत नहीं उठाई गई।
सोमवार को 4 जगह प्रशासन की टीमें पहुंचीं। दोपहर तक संसाधन जुटाने और पुलिस बुलाने में ही समय निकल गया। कार्रवाई शुरू हुई तो राजस्व विभाग की टीम खसरे पहचानने में उलझी रही।
जमवारामगढ़ तहसील के राजस्व विभाग की टीम ने बोबाड़ी ग्राम पंचायत के गोल गांव, गोड़ियाणा, गोपालगढ़ और राजपुरवास ताला में कार्रवाई की। जेडीए जोन 13 के तहसीलदार रामकल्याण मीणा के नेतृत्व में टीम ने काली पहाड़ी चारणवास, जयचंदपुरा गांवों में कार्रवाई की। हैरानी की बात रही कि टीम को अतिक्रमण कहां है, यह समझने में ही समय लग गया।
ग्राम बगवाड़ा, सिंगवाना और छापराड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए गए। प्रवर्तन अधिकारी ममता मीणा ने बताया कि मौजूद लोगों को कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण नहीं करने के लिए भी पाबंद किया गया।
सिरोही के कुंडल में गोशाला और ऑर्गेनिक खेती की आड़ में बनाई गई छह फीट ऊंची दीवार को ध्वस्त किया गया। दिल्ली रोड पर नाले के बहाव क्षेत्र को भी मुक्त कराया गया। जेडीए भूमि और बहाव क्षेत्र में सड़क पर कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन गरीब तबके पर कार्रवाई कर वाहवाही लूट रहा है। रसूखदारों के कब्जे जस के तस खड़े हैं।
जेडीए की टीम तय समय पर बीलपुर और सिरोही पहुंच गई, लेकिन राजस्व विभाग के पटवारी और गिरदावर के नहीं आने से टीम को दो घंटे इंतजार करना पड़ा। वहीं, बोबाड़ी के गोल गांव में कार्रवाई करने पहुंचे नायब तहसीलदार राज बहादुर सिंह, गिरदावर चौथमल मीणा और पटवारी राहुल जांगिड़ भी समय से नहीं पहुंचे।
जमवारामगढ़ तहसील के गोल गांव में कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। विराटनगर तहसील के गुढ़ा बैजनाथपुरा और जमवारामगढ़ तहसील के गोल गांव की सीमा चिन्हित नहीं होने को लेकर विरोध किया और कार्रवाई रुकवा दी। ग्रामीणों का आरोप है कि विराटनगर और जमवारामगढ़ तहसील के नक्शे में नदी का बहाव क्षेत्र अलग-अलग है। जमवारामगढ़ के नक्शे में नदी गुढ़ा बैजनाथपुरा की खातेदारी भूमि में जाती है, विराटनगर के नक्शे में नदी गोल गांव की खातेदारी भूमि में जाती है। नोडल अधिकारी जमवारामगढ़ एसडीएम ललित कुमार मीणा ने मामला शांत करवाया।