
Ramgarh Dam News: रामगढ़ बांध के संरक्षण को लेकर जब हाईकोर्ट में गुरुवार दोपहर सवा दो बजे सुनवाई चल रही थी, उस समय वहीं पर जमवारामगढ़ और आसपास के रहने वाले लोगों की प्रतिक्रिया सामने आईं। कुछ लोगों में उम्मीद दिखाई दी और उसी उम्मीद के साथ लोग कार्रवाई की जानकारी लेते हुए दिखाई दिए। जब इन लोगों से बात की गई तो उन लोगों का साफ-साफ यही कहना था कि अतिक्रमणों को ड्रोन-रिमोट सेंसिंग या अन्य किसी तरीके से चिन्हित कर प्रशासन को बिना दबाव तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे पानी आने के रास्ते में खड़ी दीवार हटें और इसी मानसून में पानी आने की उम्मीद पूरी हो सके।
रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने संबंधी हाईकोर्ट का आदेश स्वागतयोग्य है। प्रशासन को बिना दबाव तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। बाणगंगा व सहायक नदियों का ड्रोन और रिमोट सेंसिंग सर्वे कर सीमांकन करते हुए सभी अतिक्रमण हटाए जाएं।
-रामजी लाल मीणा, अध्यक्ष, रामगढ़ बांध बचाओ संघर्ष समिति, जमवारामगढ़
रामगढ़ बांध के पुनर्जीवन का सबसे बड़ा आधार कैचमेंट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करना है। केवल कागजी कार्रवाई से बांध का संरक्षण संभव नहीं। बाणगंगा और सहायक नदियों का सीमांकन कर अवैध आवंटन निरस्त करने के साथ अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाए।
-तुलसीदास चिंतामणि, निवासी जमवारामगढ़
रामगढ़ बांध के पुनर्जीवन के लिए गठित मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर अमल जरूरी है। कैचमेंट क्षेत्र के ड्रोन सर्वे की घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिमोट सेंसिंग और ड्रोन सर्वे कर सीमांकन तुरंत किया जाए।
-रूकमणी मीणा, प्रशासक, ग्राम पंचायत धूलाराव जी
रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट आदेश की प्रभावी पालना नहीं हुई है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण कब्जे बढ़ रहे हैं। सरकार को बिना भेदभाव अभियान चलाकर सभी अतिक्रमण तत्काल हटाने चाहिए।
-पवन कुमार शर्मा, युवा नेता, निवासी खवारानी जी
रामगढ़ बांध की मौजूदा हालत बहुत चिंताजनक है। यहां पर प्राकृतिक प्रवाह बिल्कुल खत्म हो गया है। यहां पर अतिक्रमण बढ़ गया है, ट्रैंच बन गई हैं और लोगों ने पक्की दीवारें भी बना ली हैं। सरकार लगातार बांध को पुनर्जीवित करने के प्रयास में लगी हुई है, लेकिन मौजूदा हालातों के अनुसार कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है। 14 साल पहले सराकार ने खुद कोर्ट में माना था कि रामगढ़ बांध के कैंचमेंट इलाके में 225 अवैध भूमि आवंटन की पहचान की गई है और 235.83 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण होने की भी बात मानी गई थी, लेकिन अब तक किसी तरह की प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।