रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना आज दुनिया के लिए शांति दूत के रूप में उभर रही है। उन्होंने वर्ष 2047 तक सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने का लक्ष्य बताते हुए सेना में युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
जयपुर। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को प्रदेश की राजधानी में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक आतंकी सोच समाप्त नहीं होगी, तब तक शांति के लिए हमारा प्रयास जारी रहेगा। ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह सोच-समझकर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए की गई। इसलिए ऑपरेशन सिंदूर को साहस और संतुलन के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
सवाई मानसिंह स्टेडियम में आर्मी डे पर आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम में सिंह ने कहा कि आतंकवादी यह कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारतीय सशस्त्र बल इतनी बहादुरी और तेजी से उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। सैनिकों के साहस ने दुश्मन को शरारत करने से रोका। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कठिन थीं और दबाव भी था, लेकिन जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ हमारे सैनिकों ने इस अभियान को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय रहा।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना आज दुनिया के लिए शांति दूत के रूप में उभरी है और वर्ष 2047 तक इसे दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सेनाओं में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने की दिशा में भी खास कदम उठाए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने इस दौरान राजस्थान के वीरों को भी याद किया।
गौरतलब है कि इससे पहले सुबह थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। दक्षिण-पश्चिम कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह ने भव्य परेड का नेतृत्व किया। सेना दिवस परेड में भारतीय सेना ने अपने शौर्य, साहस और अजेय शक्ति का प्रदर्शन किया।
स्वदेशी सैन्य क्षमता, आधुनिक आयुध और उभरती तकनीक को देखकर विशिष्ट अतिथि से लेकर आमजन तक कोई भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका। इस वर्ष की थीम ‘भारतीय सेना-शौर्य और बलिदान’ रखी गई। परेड में परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र एवं वीर चक्र विजेता विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म एवं अर्जुन टैंक, के-9 वज्र तोप, बीएमपी वाहन, 155 एमएम अमोघ, नामिस (नाग मिसाइल सिस्टम), पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, शिल्का हथियार प्रणाली, ड्रोन शक्ति, ड्रोन जैमर तकनीक और इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन व्हीकल का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नव गठित भैरव बटालियन सहित भारतीय सेना की सात रेजीमेंट की टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया।
अभिनव सैन्य प्रणालियों में रोबोटिक म्यूल, स्वाथी वेपन लोकेटिंग राडार, मॉड्यूलर ब्रिजिंग सिस्टम, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, वाहन आधारित इन्फेंट्री मोर्टार सिस्टम, ड्रोन जैमर सिस्टम, मोबाइल कम्युनिकेशन नोड एवं अजय केतु ऑल-टेरेन व्हीकल जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां प्रदर्शित की गईं।
भारतीय सेना के विभिन्न बैंड्स के साथ-साथ नेपाल आर्मी बैंड की भागीदारी ने भारत-नेपाल के विशेष सैन्य संबंधों को रेखांकित किया। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करने के लिए गर्ल्स एनसीसी टुकड़ी ने भी मार्च पास्ट किया। परेड से पहले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ एवं अन्य अभियानों में अदम्य साहस और वीरता के लिए शूरवीरों सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार और लांस नायक प्रदीप कुमार को मरणोपरांत ‘सेना मेडल (गैलेंट्री)’ से सम्मानित किया गया।
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