उप मुख्य श्रम आयुक्त निरंजन कुमार (केंद्रीय) ने कहा कि 29 विभिन्न श्रम कानूनों को 4 नए श्रम संहिता में बदलने की आवश्यकता इसीलिए हुई क्योंकि देश में श्रम कानून बहुत पुराने हो चुके थे।
जयपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम में बदलाव और उसमें किए गए संशोधनों और ‘जी राम जी कानून’ को लेकर मंगलवार को सरकार के कई विभागों के अधिकारी आगे आए। झालाना स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में उन्होंने इस मामले में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और इन बदलावों को मजदूरों के हित में बताया।
इस दौरान ग्रामीण विकास विभाग की सचिव पुष्पा सत्यानी ने विपक्ष के दावों को भ्रामक बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा किया कि रोजगार की गारंटी को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि उसे और मजबूत किया गया है। पहले मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं अब ‘जी राम जी’ योजना के तहत 125 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में फसलों के समय इस योजना के तहत 60 दिन काम बंद रहेगा, ताकि मजदूरों को खेती-बाड़ी का काम और अच्छी मजदूरी मिल सके। वहीं अकुशल ग्रामीण श्रमिकों को फॉर्म 6 भरने पर 15 दिनों तक काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
'ऑडिट टीम और एआई से होगी विकास कार्यों की निगरानी'
उप मुख्य श्रम आयुक्त निरंजन कुमार (केंद्रीय) ने कहा कि 29 विभिन्न श्रम कानूनों को 4 नए श्रम संहिता में बदलने की आवश्यकता इसीलिए हुई क्योंकि देश में श्रम कानून बहुत पुराने हो चुके थे। देश की औद्योगिक वृद्धि को देखते हुए नई श्रम संहिताओं की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से 4 नए श्रम संहिता लागू हो जाएंगे। रोजगार गारंटी स्कीम के अधीक्षण अभियंता आई. पी. अग्रवाल ने कहा कि नए कानून में भी ग्राम पंचायत की भूमिका पहले जैसी ही है। साथ ही इसमें अन्य विभागों की भागीगारी को बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि अब सोशल ऑडिट टीम और एआई के माध्यम से विकास कार्यों की निगरानी की जाएगी।