
फाइल फोटो
जयपुर। राजस्थान में चाइनीज मांझा प्रतिबंधित होने के बावजूद इसका उपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर मकर संक्रांति के आसपास पतंगबाजी के दौरान कई युवा इस घातक मांझे का इस्तेमाल करते हैं। इसका खामियाजा आमजन, वाहन चालकों और बेजुबान पक्षियों को भुगतना पड़ता है।
चाइनीज मांझा दरअसल सामान्य सूती धागा नहीं होता। इसे नायलॉन या सिंथेटिक फाइबर से तैयार किया जाता है, जिस पर कांच का बारीक चूरा, केमिकल पाउडर और गोंद मिलाकर लेप चढ़ाया जाता है। कई मामलों में इसे और धारदार बनाने के लिए धातु कणों तक का प्रयोग किया जाता है। यही वजह है कि यह मांझा बेहद मजबूत और तेज धार वाला हो जाता है, जो सामान्य सूती मांझे की तुलना में कई गुना ज्यादा खतरनाक है।
जब यह मांझा हवा में फैला रहता है, तो सड़क से गुजरने वाले बाइक सवार, स्कूटर चालक और साइकिल सवार इसकी चपेट में आ जाते हैं। गर्दन, चेहरे या हाथों पर लगने से गहरे घाव हो जाते हैं। राजस्थान में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें वाहन चालकों की जान तक चली गई। पक्षियों के लिए चाइनीज मांझा और भी जानलेवा साबित होता है। पतंगों से उलझकर पक्षियों के पंख, गर्दन और पैर कट जाते हैं। मकर संक्रांति के दौरान राजस्थान के कई जिलों में हर साल दर्जनों पक्षियों के घायल या मृत मिलने की घटनाएं सामने आती हैं।
राज्य सरकार ने चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद चोरी-छिपे इसकी बिक्री होती है। प्रशासन हर साल अभियान चलाकर मांझा जब्त करता है और कार्रवाई भी करता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पतंगबाजी का आनंद सुरक्षित सूती मांझे से भी लिया जा सकता है।
यह वीडियो भी देखें
Updated on:
06 Jan 2026 08:15 pm
Published on:
06 Jan 2026 07:56 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
