भीषण गर्मी के बीच चलती गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस मुद्दे पर पत्रिका से बातचीत में ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने खराब मेंटेनेंस, गलत मॉडिफिकेशन और लापरवाही को मुख्य कारण बताया। उन्होंने समय-समय पर सर्विसिंग और वायरिंग जांच की सलाह दी।
जयपुर: भीषण गर्मी के बीच राजस्थान की सड़कों पर एक खामोश खतरा तेजी से बढ़ रहा है, चलती गाड़ियों में आग। 40 डिग्री से ऊपर का तापमान कोई नई बात नहीं, लेकिन हाल के हफ्तों में वाहन अग्निकांड की बढ़ती घटनाएं यह साफ संकेत दे रही हैं कि असली समस्या सिर्फ मौसम नहीं बल्कि वाहनों की खराब देखभाल, गलत मॉडिफिकेशन और निगरानी की कमी है।
बता दें कि इस गंभीर समस्या पर राजस्थान पत्रिका ने ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों से बात की। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की सलाह…
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट प्रकाश गुप्ता के अनुसार, आजकल वाहन मालिक लोकल गैरेज से सस्ती एलईडी लाइट्स, म्यूजिक सिस्टम या सीएनजी किट लगवा लेते हैं, जो कंपनी के सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।
इन मॉडिफिकेशन में वायरिंग का लोड बढ़ जाता है और गलत फिटिंग से शॉर्ट सर्किट की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। उनका कहना है कि थोड़ी बचत के चक्कर में लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
मैकेनिकल इंजीनियर जीतेश बियानी बताते हैं कि तकनीकी दृष्टि से देखें तो फ्यूल पाइप में लीकेज, इंजन में अत्यधिक घर्षण, कूलेंट की कमी और ब्रेक सिस्टम का ओवरहीट होना…ये सब मिलकर आग की वजह बनते हैं। गर्मी में ये समस्याएं बहुत तेजी से गंभीर रूप ले लेती हैं।
कई बार वाहन चालक डैशबोर्ड पर आने वाले चेतावनी संकेतों को भी नजरअंदाज कर देते हैं। ऑटोमोबाइल इंजीनियर मुदित गोधा के अनुसार, तेज गर्मी अपने आप में आग का एकमात्र कारण नहीं होती। वाहन में पहले से मौजूद छोटी खामियां ही असली वजह बनती हैं।
आग की घटना के बाद बीमा क्लेम मिलना भी उतना आसान नहीं जितना लगता है। बीमा अधिकारी सुरेंद्र शर्मा बताते हैं कि हाल के महीनों में वाहन अग्निकांड के क्लेम में बढ़ोतरी हुई है। जांच में अक्सर सामने आता है कि वाहन मालिक ने अनधिकृत मॉडिफिकेशन कराए थे या नियमित सर्विसिंग नहीं कराई थी और ऐसे मामलों में क्लेम की शर्तें प्रभावित हो जाती हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बुधवार रात अलवर के लक्ष्मणगढ़ में चलती कार में लगी आग से हुई 6 लोगों की मौत में पांच लोग एक ही परिवार के थे। मध्यप्रदेश का ये परिवार महिला पार्वती बाई की बीमारी ठीक होने की मन्नत पूरी होने के बाद माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गया था।
बता दें कि वे हंसी-खुशी वापस लौट रहे थे। लेकिन चलती कार में लगी आग ने खुशियां चंद मिनट में छीन ली। आग संभवतः सीएनजी लीकेज होने के बाद शॉर्ट सर्किट से लगना बताया जा रहा है।
परिजनों के मुताबिक, 26 अप्रैल को पूरा परिवार वैष्णो देवी के लिए रवाना हुआ था। इसके लिए विनोद कुमार मेहरा की कार किराए से की। बताया गया है कि परिवार ने माता वैष्णो के दर्शन किए, लेकिन 29 अप्रैल को लौटते वक्त रात 11.30 बजे ये हादसा हो गया।
हादसे में संतोष (35), उसकी पत्नी शशि (30), सास पार्वती (55), बेटी साक्षी (6) और पार्वती की बड़ी बहन छोटी बाई (70) जिंदा जल गए। कार चालक विनोद मेहरा (40) को जयपुर रेफर किया गया, जहां उसकी भी उपचार के दौरान मौत हो गई।
जयपुर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित झिलाय रेलवे ओवरब्रिज पर गुरुवार को एचडीएफसी बैंक का कैश लेकर भीलवाड़ा जा रही वैन चलते-चलते आग की भीषण लपटों में घिर गई और हाइवे पर अफरा-तफरी मच गई। वैन में शॉर्ट सर्किट से अचानक चिंगारी उठी और देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया।
चालक सुरेश कुमार ने वैन को तुरंत सड़क किनारे रोका। इसके बाद बैंककर्मियों और गार्ड ने वैन से करोड़ों रुपए की नकदी से भरे तीन बक्सों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।