जालोर

दिल को छूने वाली कहानी: जन्म के बाद छोड़ दी गईं 4 नवजात बेटियां, जालोर के MCH अस्पताल में मिली नई जिंदगी

जन्म के कुछ ही घंटों बाद अपनों से जुदा हुई चार नवजात बेटियों ने जिंदगी की जंग जीत ली। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश चौधरी ने बताया कि चारों बच्चियां वर्तमान में स्वस्थ हैं।
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Aug 07, 2026
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4 बेटियों को जालोर के अस्पताल में मिली नई जिंदगी. Photo- Patrika

जालोर। जन्म के कुछ ही घंटों बाद ही छोड़ दी गईं चार नवजात बेटियों ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली। अपूर्ण विकसित अवस्था में मिली इन मासूम बच्चियों को गंभीर हालत में जालोर के एमसीएच अस्पताल की स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था। करीब दो माह तक चले गहन उपचार, चिकित्सकों की सतत निगरानी और नर्सिंग स्टाफ की देखभाल के बाद अब चारों बच्चियां पूरी तरह स्वस्थ हैं।

एसएनसीयू में बच्चियों को ऑक्सीजन सपोर्ट, मदर मिल्क बैंक से पोषण, एंटीबायोटिक दवाइयों सहित आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों के अथक प्रयासों से चारों नवजातों की हालत में लगातार सुधार हुआ और अब उन्हें शिशु गृह को सुपुर्द कर दिया गया है। वहां से नियमानुसार भविष्य में गोद देने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश चौधरी ने बताया कि चारों बच्चियां एसएनसीयू में भर्ती थीं और वर्तमान में स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि बच्चियों की देखभाल में नर्सिंग इंचार्ज मनोहर पंवार तथा नर्सिंग अधिकारी महेंद्र कुमार और नितिन सोलंकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चारों बच्चियों की स्थिति एक नजर में

  • पहली बच्ची- 2 जून को भर्ती हुई। भर्ती के समय वजन 1.400 किलोग्राम था। सात बार रक्त चढ़ाना पड़ा। अब वजन 1.885 किलोग्राम है और उम्र 63 दिन हो चुकी है।
  • दूसरी बच्ची- 6 जुलाई को भर्ती की गई। उस समय वजन 1.978 किलोग्राम था। दो बार रक्त चढ़ाया गया। अब वजन 2.135 किलोग्राम हो गया है।
  • तीसरी बच्ची- 13 जुलाई को भर्ती हुई। भर्ती के समय वजन 1.880 किलोग्राम था। वर्तमान में वजन 2 किलोग्राम से अधिक है। इसकी उम्र 23 दिन है।
  • चौथी बच्ची- 1 अगस्त को भर्ती की गई। उस समय वजन 1.520 किलोग्राम था। अब वजन बढक़र 1.720 किलोग्राम हो गया है। छह दिन की यह बच्ची भी अब स्वस्थ है।

समय पर उपचार और केयर से बची बच्चियां की जिंदगी

इन चारों नवजात बेटियों की जिंदगी बचाने की यह कहानी न केवल चिकित्सा टीम की समर्पित सेवा का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि समय पर उपचार और संवेदनशील देखभाल से सबसे नाजुक जीवन भी नई उम्मीद पा सकता है।

शिशु गृह की अधीक्षक मोहर कंवर ने बताया कि गोद प्रक्रिया के तहत इन नवजातों को 61 दिन के बाद लीगल फ्री किया जाता है। गोद के लिए कारा पोर्टल है। जिस पर गोद लेने वाले आवेदकों के आवेदन मौजूद रहते हैं।

विभिन्न स्तर की प्रक्रिया के बाद अंतिम वैरिफिकेशन जिला कलक्टर करते हैं और उसके बाद गोद की प्रक्रिया पूरी होती है। इस प्रक्रिया के बाद दो साल तक संबंधित एजेंसी की निगरानी भी गोद दिए गए बच्चे पर रहती है। गौरतलब है जालोर से भारत में ही नहीं अमेरिका और न्यूजीलेंड में एक-एक बच्चा गोद लिया गया है।

Updated on:
07 Aug 2026 06:05 pm
Published on:
07 Aug 2026 05:58 pm