जालोर

Road Accident: भीषण सड़क हादसे में पति-पत्नी और बेटी की मौत, एक साथ उठीं तीन अर्थियां तो रो पड़ा गांव, नहीं जले चूल्हे

सायला क्षेत्र के मांडकवाना गांव निवासी एक ही परिवार के तीन सदस्यों की सड़क हादसे में मौत से गांव में मातम छा गया। मुंबई में कारोबार करने वाले गोल्ड व्यापारी, उनकी पत्नी और पुत्री का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया गया।

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Feb 04, 2026
मृतक जैसाराम, पूजा और अणसीदेवी। फाइल फोटो- पत्रिका

जालोर। जिले के सायला उपखंड क्षेत्र के मांडकवाना (मोडगुणा) गांव निवासी मुंबई के गोल्ड व्यापारी, उनकी पत्नी और पुत्री की सड़क हादसे में मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद तीनों के शव पैतृक गांव लाए गए, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई। मृतक जैसाराम का बड़ा पुत्र प्रतिष्ठान पर ही था, वहीं एक बड़ी पुत्री है, जिसकी शादी हो चुकी है।

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करीब डेढ़ दशक से मुंबई में था व्यापार

मूल रूप से मांडकवाना (मोडगुणा) गांव निवासी जैसाराम पुत्र हरजीराम पिछले करीब डेढ़ दशक से मुंबई में गोल्ड का व्यापार कर रहे थे। भायंदर इलाके में उनकी ज्वेलरी का शोरूम है, जबकि मीरा रोड पर उनका आवास है, जो शोरूम के पास ही स्थित है।

पांच माह पूर्व परिवार संग केक काटा

जैसाराम ने डेढ़ दशक में मुंबई में अपनी अच्छी पहचान बना ली थी। करीब पांच माह पूर्व उन्होंने एक और नए प्रतिष्ठान की शुरुआत की थी। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में उनके पुत्र ने केक काटकर खुशी साझा की थी।

मंदिर में दर्शन कर लौट रहे थे

जैसाराम (53) अपनी पत्नी अणसीदेवी (48), पुत्री पूजा (23), सीमा और पुत्र नरेश के साथ मुंबई से नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए गए थे। दर्शन के बाद सवेरे सभी पुनः मुंबई लौट रहे थे। इसी दौरान मुंबई में कल्याण के पास हारी क्षेत्र के समीप उनकी कार की एक ट्रक से टक्कर हो गई।

हादसे में जैसाराम, अणसीदेवी और पुत्री पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं नरेश का पैर फ्रैक्चर हो गया, जबकि सीमा को भी गंभीर चोटें आई हैं। दोनों का इलाज मुंबई के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

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20 दिन पूर्व पारिवारिक कार्य से गांव पहुंचे थे

कृष्णकुमार ने बताया कि उनके चचेरे भाई जैसाराम करीब 20 दिन पूर्व पारिवारिक कार्य से गांव आए थे। हादसे के बाद तीनों शवों का पोस्टमॉर्टम कर जालोर के लिए रवाना किया गया। मंगलवार शाम को जैसे ही शव गांव पहुंचे, वहां चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में देर शाम तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। गम के माहौल के चलते गांव में शाम को चूल्हे नहीं जले।

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