Narmada Project: गुजरात से नर्मदा पानी सप्लाई बंद होने के साथ 21 दिन का क्लोजर शुरू हो गया है। राजस्थान के सैकड़ों गांवों में अब पेयजल आपूर्ति स्टॉक किए गए पानी पर निर्भर रहेगी।
जालोर। एक माह के इंतजार के बाद आखिरकार शुक्रवार से गुजरात राज्य से नर्मदा परियोजना में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई और इसके साथ ही क्लोजर प्रभावी हो गया। गुजरात और राजस्थान के बीच सहमति के बाद 1 मई से 21 मई तक यह क्लोजर प्रभावी रहेगा। इस अवधि में नर्मदा मुख्य केनाल में पानी की आपूर्ति बंद रहेगी और मरम्मत व रखरखाव कार्य किए जाएंगे।
इन 21 दिनों में संभावित जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए एफआर, डीआर और ईआर प्रोजेक्ट के अधिकारियों को दो सप्ताह पहले ही पेयजल के पर्याप्त स्टॉक के निर्देश दिए गए थे। जालोर से जुड़े एफआर और सांचौर से जुड़े डीआर प्रोजेक्ट में पहले ही पर्याप्त पानी का भंडारण कर लिया गया था, जबकि ईआर प्रोजेक्ट में लंबित कार्य पूरे होने के बाद 25 अप्रेल के बाद पानी स्टोर किया गया।
जालोर शहर सहित 300 गांव-कस्बों में नर्मदा परियोजना के शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए एफआर प्रोजेक्ट तैतरोल में स्थापित है। यहां स्टॉक टैंक में 6.75 मीटर गेज के साथ 2100 एमएल पानी का भंडारण किया गया है। इस पानी से 100 एलपीसीडी के अनुसार 21 दिनों तक पर्याप्त सप्लाई का दावा किया जा रहा है।
नर्मदा परियोजना का डीआर प्रोजेक्ट सांचौर सहित 160 गांव-कस्बों से जुड़ा हुआ है। इस प्रोजेक्ट का स्टॉक टैंक सांचौर शहर से 3 किलोमीटर दूर पहाड़पुरा में स्थित है। यह स्टॉक टैंक अन्य टैंकों की तुलना में लगभग आधा यानी 1045 एमएल क्षमता का है, लेकिन गांव-कस्बों की संख्या कम होने के कारण यहां भी 21 दिनों तक पानी का पर्याप्त स्टोर उपलब्ध रहेगा।
नर्मदा परियोजना का ईआर प्रोजेक्ट भीनमाल शहर सहित 306 गांव-कस्बों से जुड़ा है, लेकिन इसमें अभी कुछ कार्य शेष है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट से भीनमाल शहर सहित 19 गांव-कस्बे ही जुड़े हैं। यहां स्टॉक टैंक को 6 मीटर स्तर तक भरा गया है और कुल 2130 एमएल पानी का भंडारण किया गया है।
नर्मदा परियोजना में 21 दिन का क्लोजर 1 मई से प्रभावी होगा। पेयजल योजनाओं के लिए पानी के स्टॉक को लेकर पहले ही जानकारी दे दी गई थी। क्लोजर अवधि में मरम्मत और रखरखाव कार्य किए जाएंगे।
तैतरोल में एफआर प्रोजेक्ट के तहत पानी का पर्याप्त स्टॉक कर लिया गया है। 21 दिनों के लिए पर्याप्त उपलब्धता है। आगामी दिनों में अब आरडब्ल्यूआर से ही पानी की सप्लाई निर्भर करेगी।
क्लोजर के दौरान संभावित जल संकट से निपटने के लिए पालड़ी सोलंकियान स्टॉक टैंक को पूरी क्षमता तक भर लिया गया है। प्रोजेक्ट से जुड़े गांवों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।