जांजगीर चंपा

मासूमों का खतरनाक सफर: स्कूली वैन पलटने से 15 बच्चे घायल, ऑटो-ई-रिक्शा में ठूंसकर भेज रहे स्कूल

Road Accident: जांजगीर-चांपा जिले के अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में स्कूली बच्चों को लाने ले जाने के लिए चल रहे वाहनों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है। स्कूली बच्चों को वैन, आटो व ई-रिक्शा में ठूंस-ठूंसकर भर रहे हैं और स्कूल छोड़ रहे हैं।

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हादसा (Photo Source- Patrika)

CG Road Accident: जांजगीर-चांपा जिले के अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में स्कूली बच्चों को लाने ले जाने के लिए चल रहे वाहनों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है। स्कूली बच्चों को वैन, आटो व ई-रिक्शा में ठूंस-ठूंसकर भर रहे हैं और स्कूल छोड़ रहे हैं। भले ही बच्चों को सुरक्षित तरीके से घर से स्कूल और स्कूल से घर तक पहुंचाने के लिए सख्त नियमों की बात की जाती हो लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाता है। स्कूल संचालकों को इस बात की कोई चिंता नहीं है।

इसी अनदेखी के कारण बुधवार को कुथूर में अनियंत्रित वैन खड़ी ट्रैक्टर ट्राली में जा टकराई। इससे 15 बच्चे घायल हो गए। इसमें 3 से 4 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए है। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। लगातार हो रहे दुर्घटना के बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। शायद उसको बड़ा हादसे का इंतजार है। हालांकि इसमें अभिभावक भी जिम्मेदार है।

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स्कूली सफर, ऑटो, ई-रिक्शा, वैन में ठूंसकर पहुंचा रहे स्कूल

जिले में इस समय खचाखच स्कूली बच्चों से भरे वैन, ऑटो और ई-रिक्शा के दृश्य आम है। यह स्थिति बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके लिए जहां एक ओर जिला प्रशासन कसूरवार है, वहीं दूसरी ओर अभिभावक भी कम जिम्मेदार नहीं है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिन प्राइवेट वाहनों से बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, उन पर न तो स्कूल का नाम लिखा होता है और न परिवहन विभाग के मानक पूरे हैं।

बुधवार को एक बड़ी दुर्घटना टल गई। मुड़पार गांव से वैन में बच्चों को बैठाकर सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल कुथूर आ रहे थे। इसी दौरान कुथूर गांव के मेन रोड में चालक के आंखों के सामने अचानक अंधेरा छा गया। इससे अनियंत्रित वैन सामने खड़ी ट्रैक्टर ट्राली से टकराकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना जबरदस्त हुआ कि वैन सडक़ में ही तीन बार पलटी। इससे वैन के परखच्चे उड़ गए। वैन में बच्चों की चीख पुकार मच गई। हादसे के समय वैन में करीब 15 से अधिक छात्र सवार थे। लगभग सभी की उम्र 4 से 8 साल के बीच हैं। 4 साल का बच्चा के पैर में चोट आई है। वही 5 साल के बच्चा प्रभास बरेठ के सिर में चोट लगी है।

शिक्षिका संतोषी शर्मा के हाथ फ्रेक्चर हो गया है। वैन के परखच्चे उड़ गए। बड़ा हादसा टल गया। आसपास में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और वैन में फंसे बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। कुछ बच्चों को कांच टूटने से चोटें आईं, जबकि कुछ को सिर और हाथ-पैर में गंभीर चोट लगी है। किसी भी भी बच्चे की मौत नहीं हुई। पिछले साल जिला मुख्यालय में ई-रिक्शा पलटने से 6 छात्र घायल हुए थे। 6 सीटर वैन में 12 से 15 बच्चे ठूंसकर बैठाया जाता है। बावजूद जिम्मेदार परिवहन विभाग व यातायात पुलिस को कार्रवाई करने फुर्सत नहीं है। साल में कोरम पूरा करने के लिए एकाध बार कार्रवाई की खानापूर्ति की जाती है।

जिम्मेदारों को आदेश का इंतजार

बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर ई-रिक्शा, ऑटो व बिना पीले रंग के वाहनों में स्कूली बच्चों का जाना ले जाना प्रतिबंधित है। साथ ही लगातार इससे दुर्घटनाएं सामने आ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रही है, शायद उसको आदेश का इंतजार है। मानकों के अनुसार स्कूल वाहन पीले कलर का होना चाहिए। पुलिस कंट्रोल रुम, फायर विभाग, एबुलेंस, स्कूल का फोन नंबर अंकित होना चाहिए। वाहन में स्पीड गर्वनर लगा होना चाहिए। खिड़कियों पर रेलिंग लगी होनी चाहिए। जीपीएस लगा होना चाहिए सहित अन्य शामिल है। लेकिन इसमें से किसी नियम का पालन नहीं हो पा रहा है।

दोपहिया वाहन की जांच तेज, स्कूली वाहन की जांच ही नहीं

जिले में दोपहिया वाहनों की जांच तेजी से और हर रोज यातायात पुलिस द्वारा की जा रही है। हर रोज चालान काटा जा रहा है। लेकिन नियम विरूद्ध स्कूली वाहन के मामले में अफसर आंखे बंद किए हुए हैं। फर्राटा भरने वाले अधिकांश की कमान नाबालिगों के हाथों में दिखाई दे रही है। इससे वैन, आटो, ई-रिक्शा पलटने की भी कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। फिर भी पुलिस उन्हें यातायात नियम बताना मुनासिब नहीं समझ रही है।

वैन में क्षमता से ज्यादा बच्चे सवार थे। जो नियम के विरूद्ध है। साथ ही चालक की जगह स्वयं संचालक द्वारा वैन चलाया जा रहा था। ऐसी घटना की पुनवरावृत्ति न हो, इस संबंध में प्रयास किया जाएगा। जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। - अशोक पाटले, बीईओ नवागढ़

स्कूली वाहन पीला कलर का होना चाहिए। क्षमता से ज्यादा बच्चों को बिठाना गलत है। समय-समय पर वाहनों के फिटनेस की जांच करते हैं। जल्द ही ऐसे वाहन चालकों पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - गौरव साहू, जिला परिवहन अधिकारी, जांजगीर-चांपा

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Published on:
19 Mar 2026 02:26 pm
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