
CG News: खेती-किसानी के लिए सहकारी समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों को कर्ज लेने में अब नकद राशि ज्यादा मिलेगी लेकिन दूसरी ओर खाद-बीज कम मिलेगा। अब तक समितियों के माध्यम से किसानों को कुल लोन राशि में से 60 प्रतिशत राशि ही नकद दी जाती थी और 40 फीसदी राशि के बदले किसानों को समिति से खाद-बीज दिया जाता था। लेकिन आगामी खरीफ सीजन 2026–27 में नकद राशि 70 प्रतिशत दी जाएगी और खाद-बीज 30 प्रतिशत ही दिया जाएगा।
नकद ऋण की सीमा 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किए जाने से किसानों के पास खेती की अन्य जरूरतों, जैसे मजदूरी भुगतान और जुताई आदि के लिए अधिक नकद राशि उपलब्ध होगी। हालांकि ऐसे किसानों को खासकर बड़े किसान जिन्हें ज्यादा खाद-बीज की जरूरत होती है, उन्हें समस्या होगी। क्योंकि समितियों में खाद किसानों को कम कीमत में मिलता है। ऐसे में किसानों को खाद की पूर्ति के लिए बाहर मार्केट से खाद खरीदना मजबूर होना पड़ेगा। जिससे दोगुना कीमत में खाद खरीदना पड़ेगा।
कृषक चेतना मंच के जिला सहसंयोजक संदीप तिवारी के मुताबिक, कृषि ऋण में नकद राशि बढऩे से निश्चित रूप से किसानों को फायदा होगा लेकिन खाद-बीज की मात्रा कम होने से समस्या भी आएगी। खाद-बीज समितियों से कम मिलने की स्थिति में किसानों को खुले मार्केट से खरीदना पड़ेगा, जहां दोगुने कीमत में खाद-बीज खरीदने की मजबूरी हो जाएगी। प्रति एकड़ कर्ज की कुल राशि में बढ़ोतरी करनी चाहिए, खाद-बीज समितियों से 40 प्रतिशत ही देना चाहिए।
सहकारी समितियों में (धान सिंचित ) एक एकड़ के एवज में किसान को कुल 26,400 रुपए कृषि लोन मिलेगा। इसमें 70% नकद यानी 18480 रुपए नकदी मिलेगा जब खाद-बीज के लिए 30% यानी 7920 रुपए का वस्तु किसान ले पाएंगे। जबकि पूर्व में किसान को नकद के रूप में 15840 रुपए और 10,560 रुपए का खाद-बीज मिलता था।
खरीफ सीजन 2026-27 के लिए सहकारी समितियों में खाद का भंडारण शुरू हो गया है, लेकिन खाद की किल्लत का असर भंडारण पर दिख रहा है। आगामी खरीफ सीजन के लिए जिले के सहकारी समितियों में 39,200 मेट्रिक टन खाद भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें विरूद्ध अब तक 9874 मेट्रिक टन खाद का ही भंडारण हो पाया है। इसमें यूरिया खाद 21,000 एमटी के विरूद्ध 4322 एमटी, डीएपी 5750 एमटी टन के विरूद्ध 1681 एमटी, एनपीके 3,300 एमटी के विरूद्ध 1962 एमटी का ही भंडारण हुआ है। खरीफ के लिए अभी किसानों को वितरण शुरू नहीं किया गया है।