Janjgir Electricity Department Corruption: जांजगीर-चांपा में बिजली विभाग पर मीटर काटने और बकाया बिल वसूली के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। उपभोक्ताओं का दावा है कि कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगे जा रहे हैं। मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

Power Connection Cut: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मीटर काटने और बकाया बिजली बिल की वसूली के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा कार्रवाई का डर दिखाकर पैसों की मांग की जाती है। ऐसे मामलों की चर्चा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हो रही है। आरोपों के बाद विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ताजा मामला शिवरीनारायण क्षेत्र का है, जहां एक उपभोक्ता ने स्थानीय लाइनमैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उपभोक्ता भरत लाल कश्यप से उसके दिवंगत पिता के नाम पर दर्ज पुराने बिजली बिल के मामले में कथित रूप से "सेटिंग" के नाम पर रकम मांगी गई। आरोप है कि राशि देने के बावजूद उसके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, उपभोक्ता के पिता के नाम पर करीब 15 वर्ष पुराना बिजली बिल बकाया था। विभाग ने लगभग 14 वर्ष पहले उस कनेक्शन पर कार्रवाई करते हुए मीटर जब्त कर लिया था। बाद में पिता के निधन के बाद भरत लाल कश्यप ने अपनी पत्नी राधिका कश्यप के नाम पर नया कनेक्शन लिया और नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करता रहा।
उपभोक्ता का आरोप है कि कुछ माह पहले शिवरीनारायण फीडर के एक लाइनमैन ने पुराने बकाया मामले को निपटाने के नाम पर 15 हजार रुपए की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने 5 हजार रुपए दे भी दिए, लेकिन इसके बाद भी उसके घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इस घटना के बाद वह शिकायत लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों के पास पहुंचा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता पर वास्तव में बकाया राशि है तो विभाग को नियमानुसार नोटिस जारी कर कार्रवाई करनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों की आड़ लेकर उपभोक्ताओं पर दबाव बनाया जाता है और कथित रूप से अवैध वसूली की जाती है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
घटना के बाद क्षेत्र के उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि किसी कर्मचारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर उपभोक्ता और स्थानीय लोग जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें बिजली विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं और आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है।