Vedanta Power Plant Accident: वेदांता पावर प्लांट हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक श्रमिक ने रुंधे गले से बताया कि धमाका ऐसा हुआ, लगा धरती फट गई। बता दें कि हादसे में अब तक 19 मजदूरों की मौत हो गई..
Vedanta Power Plant Accident: वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब मृतकों की संख्या 19 हो गई है, जबकि 17 मजदूर घायल है। प्रबंधन ने अब तक 17 मृतकों की शिनाख्ती कर इसकी सूची जारी की है। मृतकों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के 5-5, झारखंड के 3, बिहार और उत्तरप्रदेश के 2-2 मजदूरों की मौत हो गई। बता दें कि मंगलवार दोपहर सक्ती जिले के सिंगीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर की पाइपलाइन फटने से यह बड़ा हादसा हो गया।
हादसे में मरने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती है क्योंकि 17 मजदूर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। रायगढ़ के जिंदल अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती घायलों का उपचार जारी है।इस भयाकन हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक श्रमिक ने रुंधे गले से बताया कि हम रोज की तरह अपना पसीना बहा रहे थे, तभी एक ऐसा धमाका हुआ जैसे धरती फट गई हो। पलक झपकते ही चारों ओर खौफनाक अंधेरा और गर्म भाप का गुबार छा गया। मंजर इतना वीभत्स था कि कई साथी मौके पर ही कोयला बन गए। ये आंकड़े नहीं, उन परिवारों का भविष्य थे जो बिहार के धनबाद जैसे दूरस्थ इलाकों से अपनी आंखों में बेहतर कल के सपने संजोकर यहां आए थे। आज उन सपनों की राख प्लांट के मलबे में बिखरी पड़ी है।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और एसपी प्रफुल ठाकुर मौके पर जरूर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल बड़े उद्योगों के संरक्षण में लगा रहता है, जबकि समय-समय पर होने वाले सुरक्षा ऑडिट सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाते हैं। यदि श्रम विभाग और औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो आज ये सभी मजदूर सुरक्षित अपने घर में होते। प्लांट के बाहर जमा सैकड़ों लोगों की भीड़ और उनका हंगामा इस बात का गवाह है कि अब सब्र का बांध टूट चुका है।
प्रशासन ने हमेशा की तरह मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और प्रबंधन ने अपनी एक कमेटी बना दी है। पर सवाल वही है क्या इन जांचों से उन अनाथ हुए बच्चों को उनके पिता वापस मिलेंगे। क्या हर बार की तरह मामला कागजों में दफन कर दिया जाएगा या इस बार जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा चलेगा। न्याय केवल मुआवजे के चेक बांटने से नहीं, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने से मिलेगा।
रायगढ़ के अस्पताल में भर्ती कई मजदूर 80 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। उनके शरीर की चमड़ी उधड़ चुकी है, लेकिन दर्द इससे कहीं ज्यादा गहरा है। अस्पताल के गलियारों में सन्नाटा पसरा है, जिसे सिर्फ परिजनों की दबी हुई सिसकियां तोड़ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार अगले 48 घंटे बेहद नाजुक हैं।
रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार),
अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड),
आकिब खान (दरभंगा, बिहार),
सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
अब्दुल करीम (झारखंड),
उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़),
शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल),
पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
अशोक परहिया (पलामू, झारखंड),
मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़),
कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल),
नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़),
शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)
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