
Rajasthan Jhalawar Aklera Road Accident: झालावाड़ जिले के अकलेरा एरिया से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर घाटोली थाना क्षेत्र के गुलखेड़ी गांव के समीप रविवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कमलेश्वर महादेव मंदिर से दर्शन कर लौट रहे तंवर समाज के श्रद्धालुओं से भरा एक लोडिंग वाहन चालक की लापरवाही के कारण अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में दो बुजुर्ग महिलाओं सहित तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 16 अन्य श्रद्धालु घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, लोडिंग वाहन में कुल 21 श्रद्धालु सवार थे। ये सभी शनिवार शाम को अपने गांव से रवाना हुए थे और रविवार शाम को मंदिर में दर्शन करने के बाद वापस अपने गांव 'देवरी मंदिर' लौट रहे थे।
रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब एक बजे गुलखेड़ी गांव के पास वाहन हादसे का शिकार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के अनुसार, दुर्घटना के वक्त अधिकांश लोग सो रहे थे, तभी चालक की लापरवाही से गाड़ी अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई।
दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है। राधीबाई (65) पत्नी प्रताप तंवर, निवासी: घोड़ाखेड़ा, घीसीबाई (70) पत्नी मांगीलाल तंवर, निवासी: देवरी मंदिर और पांचूलाल तंवर (27) पुत्र प्यारा लाल, निवासी: रामपुरिया।
घटना की सूचना मिलते ही घाटोली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर अकलेरा सेटेलाइट अस्पताल पहुंचाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
इस हादसे में कुल 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। शेष 14 घायलों का इलाज जारी है। जिला मुख्यालय (निजी अस्पताल) में अरविंद तंवर, पप्पूलाल, ललता बाई, ममता बाई, सुकना बाई, पंकज, रामप्रसाद (नायगांव भालता), मोरम बाई (घोड़ाखेड़ा) और आकाश का इलाज जारी है। वहीं, अकलेरा (निजी अस्पताल) में अनार सिंह, कमली बाई, रोशन, गुड्डी बाई (देवरी मंदिर), आस्था, बंशीलाल और प्रभुलाल का इलाज चल रहा है।
इस सड़क हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक यात्राओं के दौरान मालवाहक वाहनों के अवैध उपयोग की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडिंग वाहन सामान ढुलाई के लिए बने हैं, न कि यात्रियों के लिए। इनमें यात्रा करना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते।
ग्रामीण क्षेत्रों में कम खर्चीला और आसानी से उपलब्ध होने के कारण लोग अक्सर ट्रैक्टर-ट्रॉली या लोडिंग पिकअप में क्षमता से अधिक (कई बार 50 से 70 लोग तक) बैठकर यात्रा करते हैं।
इस क्षेत्र में धार्मिक यात्राओं के दौरान मालवाहक वाहनों के पलटने से पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन की सख्ती दिखाई दे रही है और न ही आम जनता में जागरूकता आ रही है।
भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षित यात्री वाहनों के उपयोग के लिए जागरूक करना बेहद जरूरी है।