15 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झालावाड़ में 10 दिन में 3 मौतें, तीन ने किया आत्मघाती प्रयास; क्या गरीबी, नशा और अवसाद हैं वजह?

झालावाड़ जिले की एक मजदूर बस्ती में महज 10 दिनों के भीतर आत्महत्या और आत्मघाती प्रयास के छह मामलों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद गरीबी, नशे की बढ़ती लत और मानसिक तनाव जैसे कारणों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

3 min read
Google source verification

झालावाड़

image

Akshita Deora

image

जयप्रकाश सिंह

Jun 15, 2026

Bhawanimandi Youth Death Case

मृतक की बहनों और मृतक नंद किशोर का फाइल फोटो: पत्रिका

Bhawanimandi Youth Death Case: भवानीमंडी में आरटीएम मिल के सामने बसी भीमनगर कॉलोनी के लोग इन दिनों एक अनजाने भय के साए में जी रही है। बीते 10 दिनों में यहां तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली, जबकि तीन अन्य ने ऐसा ही प्रयास किया। लगातार हुई इन घटनाओं ने करीब छह हजार आबादी वाली इस मजदूर बस्ती को झकझोर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक ही कॉलोनी में इतने कम समय में छह लोग जीवन से निराश हो गए? क्या इसके पीछे कोई साझा कारण है या यह महज संयोग है? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पत्रिका टीम रविवार को भीमनगर पहुंची। करीब एक हजार मकानों वाली इस कॉलोनी में जिन घरों में हादसे हुए, वहां आज भी मातम पसरा है। पड़ोसी और रिश्तेदार एक-दूसरे से यही पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।

कोई परिवार समझ नहीं पा रहा वजह

27 मई से 6 जून के बीच हुई तीनों आत्महत्याओं में सिर्फ एक बात ही समान है किे परिवारों के पास आज भी कोई स्पष्ट वजह नहीं है। मृतक 55 वर्षीय हम्माल के बेटे का कहना है कि परिवार में कोई बड़ा विवाद या परेशानी नहीं थी। वहीं 44 वर्षीय विनोद उर्फ सोनू विश्वकर्मा के पिता सत्यनारायण बताते हैं कि परिवार नया मकान खरीदने के बाद शिफ्टिंग की तैयारी कर रहा था। घटना से कुछ घंटे पहले तक उनकी बेटे से सामान्य बातचीत हुई थी। 24 वर्षीय नंदकिशोर सुमन की मां बद्रीबाई बताती हैं कि बेटा मजदूरी कर परिवार का सहारा था। घटना वाले दिन भी उसका व्यवहार सामान्य था।

क्या कोई साझा कड़ी है?

तीनों मृतक कॉलोनी के अलग-अलग हिस्सों में रहते थे। नंदकिशोर और 55 वर्षीय मृतक रिश्तेदार जरूर थे, लेकिन लंबे समय से दोनों परिवारों में बोलचाल नहीं थी। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि छहों व्यक्ति किसी एक समूह का हिस्सा नहीं थे और नियमित रूप से साथ में उठते-बैठते भी नहीं थे। यही कारण है कि घटनाओं के पीछे कोई सीधा संबंध अब तक सामने नहीं आया है।

तीन लोगों की ऐसे बचाया

इसी अवधि में तीन अन्य लोगों ने भी आत्महत्या का प्रयास किया। एक मामले में भतीजी की सतर्कता से जान बच गई, जबकि दो अन्य मामलों में परिजनों ने समय रहते हस्तक्षेप कर लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इतने कम समय में छह मामले सामने आना पहली बार है।

आर्थिक संघर्ष और नशे का प्रभाव

भीमनगर मुख्य रूप से मजदूरों की बस्ती है। अधिकांश लोग टेक्सटाइल मिल, मंडी और निर्माण कार्यों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। आत्महत्या करने वाले और प्रयास करने वाले अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आर्थिक दबाव इसके पीछे एक कारण हो सकता है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आकाश देथा का कहना है कि कॉलोनी में शराब, गांजा और नशीली गोलियों का चलन भी बढ़ा है।

उनका मानना है कि इस समस्या पर गंभीर सामाजिक पहल की जरूरत है। मनोचिकित्सक डॉ. शकील अंसारी का कहना है कि आत्महत्या जैसी घटनाओं के पीछे अक्सर कई कारण एक साथ काम करते हैं। तनाव, आर्थिक दबाव, सामाजिक परिस्थितियां और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं इसके कारक हो सकती हैं।

पुलिस तक पहुंचे सिर्फ दो मामले

भवानीमंडी थानाधिकारी प्रमोद शर्मा के अनुसार छह घटनाओं में से केवल दो मामलों की जानकारी पुलिस तक पहुंची। दोनों मामलों में परिजनों ने आगे कार्रवाई नहीं चाही। अन्य घटनाएं पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सकीं।

जवाब मांगते सवाल

भीमनगर के सामने अब भी कुछ सवाल खड़े हैं। क्या 10 दिन में हुई छह घटनाएं महज संयोग हैं? क्या आर्थिक संघर्ष और बढ़ता नशा इसके पीछे भूमिका निभा रहे हैं? क्या मजदूर वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है? इन सवालों के जवाब भले अभी न मिले हों, लेकिन तीन मौतों और तीन प्रयासों ने भीमनगर को यह सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया है कि आखिर उसके बीच ऐसा क्या बदल रहा है, जिसे अभी तक कोई समझ नहीं पा रहा।